Defence Monitor

Editorial

एमक्यू-9बी से कोलैबोरेटिव कॉम्बैट विमानों तक: भारत के एयर डोमिनेंस में सहयोग

एमक्यू-9बी से कोलैबोरेटिव कॉम्बैट विमानों तक: भारत के एयर डोमिनेंस में सहयोग

भारत रक्षा-विकास के महत्त्वपूर्ण दौर में खड़ा है। जटिल भू-राजनीतिक परिस्थितियों से उसका सामना है, जिसमें सीमा पर तनाव, महासागरीय चुनौतियाँ और बहुमुखी खतरे शामिल हैं। विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र और उभरती वैश्विक शक्ति के रूप में भारत को अपनी संप्रभुता की रक्षा करने और विभिन्न क्षेत्रों में अपनी ताकत का प्रदर्शन करने के लिए ‘कटिंग-ऍज सॉल्यूशंस’ की ज़रूरत है। भारत ने हाल में जनरल एटॉमिक्स एयरोनॉटिकल सिस्टम्स इनकॉरपोरेटेड (जीए-एएसआई) द्वारा विकसित एमक्यू-9बी अनमैन्ड एयरक्राफ्ट सिस्टम (यूएएस) को हासिल किया है, जो इन लक्ष्यों को प्राप्त करने में एक लंबी छलाँग है। एमक्यू-9बी के रूप में भारत को अपनी…
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‘ला पेरोस’ मलक्का की खाड़ी में नौ देशों की नौसेनाओं का युद्धाभ्यास

‘ला पेरोस’ मलक्का की खाड़ी में नौ देशों की नौसेनाओं का युद्धाभ्यास

जनवरी के महीने में फ्रांसीसी नौसेना ने पूर्वी हिंद महासागर में ला पेरोस 2025 अभ्यास किया। हर दो साल में होने वाला यह बहुराष्ट्रीय ला पेरोस अभ्यास इंडोनेशियाई द्वीपसमूह के आसपास पूर्वी हिंद महासागर में 16 से 24 जनवरी तक चला। फ्रांस के सहयोगी और मित्र नौ देशों की नौसेनाओं ने इसमें भाग लिया। इसका उद्देश्य हिंद-प्रशांत क्षेत्र में महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों को सुरक्षित रखने के लिए प्रशिक्षण देना है। हालांकि इस अभ्यास का घोषित फोकस चीन नहीं था, पर जिन तीन जलडमरूमध्यों में यह हुआ, उनका उपयोग चीनी बेड़े, वाणिज्यिक और सैनिक दोनों बड़े पैमाने पर करते हैं। इस…
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चीन से रिश्तों का नया दौर

चीन से रिश्तों का नया दौर

भारत की सुदूर-पूर्व विदेश-नीति के मद्देनज़र दो घटनाओं ने हाल में खासतौर से ध्यान खींचा है। दोनों चीन और उत्तरी कोरिया से जुड़ी हैं। ये दोनों प्रसंग ध्रुवीकरण से जुड़ी वैश्विक-राजनीति के दौर में भारत की स्वतंत्र विदेश-नीति की ओर भी इशारा कर रहे हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल ने गत 18 दिसंबर को बीजिंग में चीनी विदेश मंत्री वांग यी से मुलाकात की। इस बैठक के परिणामों से लगता है कि दोनों देश भारत पिछले चार साल से चले आ रहे गतिरोध को दूर करके सहयोग के नए रास्ते तलाश करने पर राजी हो गए हैं। चीन-भारत सीमा…
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दक्षिण एशिया के तेजी से बदलते घटनाक्रम में भारत की भूमिका

दक्षिण एशिया के तेजी से बदलते घटनाक्रम में भारत की भूमिका

ऐसे दौर में जब यूरोप और पश्चिम एशिया में युद्ध की स्थिति है, भारत के आसपास के देशों में परिस्थितियाँ हालांकि उतनी चिंतनीय नहीं हैं, पर इलाके में स्थिरता भी नहीं है। सबसे ज्यादा अस्थिरता म्यांमार में है, जिसके रखाइन क्षेत्र पर बागी अराकान आर्मी का कब्जा हो गया है और वहाँ का सैनिक-शासन धीरे-धीरे परास्त होता दिखाई पड़ रहा है। पिछले साल पाकिस्तान, श्रीलंका, मालदीव और नेपाल में किसी न किसी रूप में सत्ता परिवर्तन हुए हैं और अफगानिस्तान 2021 में हुए सत्ता-परिवर्तन के बावजूद तालिबान सरकार को वैश्विक-मान्यता नहीं मिल पाई है। इस लिहाज से भारत और भूटान…
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बढ़ती समुद्री ताकत और आत्मनिर्भरता

बढ़ती समुद्री ताकत और आत्मनिर्भरता

15 जनवरी 2025 का दिन भारत के इतिहास में ऐतिहासिक बन गया, जब इस दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में भारतीय नौसेना के तीन अग्रिम पंक्ति के युद्धपोतों, नीलगिरि (प्रोजेक्ट 17ए स्टैल्थ फ्रिगेट क्लास के प्रमुख पोत), सूरत (प्रोजेक्ट 15बी स्टैल्थ डिस्ट्रॉयर क्लास के चौथा और अंतिम पोत) वागशीर (स्कोर्पिन-क्लास प्रोजेक्ट की छठी और अंतिम पनडुब्बी) को नौसेना डॉकयार्ड, मुंबई में एक साथ नौसेना में शामिल किया गया। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत एक प्रमुख समुद्री शक्ति के रूप में उभरने के लिए तैयार है। यह पहली बार है जब तीन युद्धपोत एक साथ…
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बड़े स्तर पर होंगे रक्षा-सुधार इस साल

बड़े स्तर पर होंगे रक्षा-सुधार इस साल

भारत ने नए साल की पूर्व संध्या पर वर्ष 2025 को रक्षा ‘सुधार वर्ष’ घोषित किया है और कहा कि इसका उद्देश्य तीनों सेवाओं के बीच तालमेल को बढ़ाने और सेना को तकनीकी रूप से उन्नत युद्ध के लिए तैयार बल में बदलने के लिए एकीकृत थिएटर कमांड शुरू करना होगा। नियोजित सुधारों का व्यापक उद्देश्य रक्षा अधिग्रहण प्रक्रियाओं को सरल और समय-संवेदनशील बनाना, प्रमुख हितधारकों के बीच गहन सहयोग सुनिश्चित करना, बाधाओं को दूर करना, अकुशलताओं को समाप्त करना और संसाधनों का अधिकतम उपयोग करना होगा। रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि साल 2025 को ‘सुधार वर्ष’ के रूप…
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ट्रंप के नए कार्यकाल से उम्मीदें और आशंकाएँ

ट्रंप के नए कार्यकाल से उम्मीदें और आशंकाएँ

दूसरी बार अमेरिका के राष्ट्रपति पद को संभालने वाले डोनाल्ड ट्रंप की भूमिका को लेकर दुनियाभर में कई प्रकार के अंदेशे और उम्मीदें एक साथ हैं। उनके कार्यभार संभालने के ठीक एक दिन पहले पश्चिम एशिया में हमास और इसराइल के बीच युद्धविराम होना इसका पहला उदाहरण है। अब उम्मीद की जा रही है कि वे यूक्रेन के युद्ध को खत्म कराने के प्रयास भी करेंगे। लगता यह भी है कि जियो-पोलिटिकल स्तर पर दुनिया में हाईटेक-दौर की शुरुआत होने जा रही है। ‘अमेरिकी महानता’ की पुनर्स्थापना के लिए डोनाल्ड ट्रंप ने अवैध आप्रवासियों पर कड़ी कार्रवाई शुरू कर दी…
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मध्य-फरवरी तक भारत पहुँचेगा आईएनएस तुशिल

मध्य-फरवरी तक भारत पहुँचेगा आईएनएस तुशिल

भारतीय नौसेना के नवीनतम स्टैल्थ गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट आईएनएस तुशिल गत 17 दिसंबर 24 को रूस के कालिनिनग्राद से भारत के लिए रवाना हुआ, जो उसकी पहली परिचालन तैनाती की शुरुआत है। इसके फरवरी के मध्य तक भारत के पश्चिमी तट पर आने की शा है। रूस में निर्मित इस पोत को गत 9 दिसंबर रक्षामंत्री राजनाथ सिंह की उपस्थिति में नौसेना में शामिल किया गया था। रक्षामंत्री ने इस पोत को भारत की बढ़ती समुद्री शक्ति का गौरवपूर्ण प्रमाण और रूस के साथ दीर्घकालिक संबंधों में महत्वपूर्ण मील का पत्थर बताया। राजनाथ सिंह ने भारत के ‘आत्मनिर्भर भारत’ के…
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अंतरिक्ष में सफलताओं की कहानियाँ लिखेगा यह साल

अंतरिक्ष में सफलताओं की कहानियाँ लिखेगा यह साल

इक्कीसवीं सदी में भारत की सफलता-यात्रा की सबसे बड़ी सफलताओं में अंतरिक्ष-कार्यक्रम को भी रखा जाएगा। इस दृष्टि से 2025 का वर्ष देश के अंतरिक्ष-अनुसंधान में सफलताओं की कुछ नई कहानियाँ लिखेगा। 2024 के अंत के साथ शुरू हुई, इस कहानी के कई अध्याय इस साल लिखे जाएँगे। नए साल के पहले छह महीनों में छह बड़े मिशन लॉन्च होने जा रहे हैं। इनमें चार जीएसएलवी, तीन पीएसएलवी और एक एसएसएलवी रॉकेटों का प्रक्षेपण शामिल है। इस साल इसरो ने 36 सैटेलाइटों का प्रक्षेपण करने की तैयारी की है। इनमें सबसे ज्यादा ध्यान खींचेगा अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन में भारतीय अंतरिक्ष…
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अंतरिक्ष में ऐतिहासिक सफलता

अंतरिक्ष में ऐतिहासिक सफलता

भारत ने अंतरिक्ष उपलब्धियों के क्षेत्र में ऐतिहासिक सफलता के अंतर्गत भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने स्वायत्त अंतरिक्ष डॉकिंग तकनीक का सफलतापूर्वक प्रदर्शन किया। स्पेस डॉकिंग एक्सरसाइज मिशन के अतर्गत दो सैटेलाइट को जोड़ने या कनेक्ट (डॉक) करने की प्रक्रिया पूरी कर ली। उपग्रह एसडीएक्स 01 तथा एसडीएक्स 02 को डॉकिंग के माध्यम से मिला दिया। यह एक ऐतिहासिक क्षण रहा, जिसमें इसरो के वैज्ञानिक दोनों उपग्रहों को पहले 15 मीटर से 3 मीटर निकट लाए, फिर उन दोनों को वहीं रोका गया, इसके बाद दोनों को एक साथ जोड़ दिया गया। इस उपलब्धि के साथ भारत दुनिया में…
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