जनवरी के महीने में फ्रांसीसी नौसेना ने पूर्वी हिंद महासागर में ला पेरोस 2025 अभ्यास किया। हर दो साल में होने वाला यह बहुराष्ट्रीय ला पेरोस अभ्यास इंडोनेशियाई द्वीपसमूह के आसपास पूर्वी हिंद महासागर में 16 से 24 जनवरी तक चला। फ्रांस के सहयोगी और मित्र नौ देशों की नौसेनाओं ने इसमें भाग लिया। इसका उद्देश्य हिंद-प्रशांत क्षेत्र में महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों को सुरक्षित रखने के लिए प्रशिक्षण देना है।
हालांकि इस अभ्यास का घोषित फोकस चीन नहीं था, पर जिन तीन जलडमरूमध्यों में यह हुआ, उनका उपयोग चीनी बेड़े, वाणिज्यिक और सैनिक दोनों बड़े पैमाने पर करते हैं। इस अभ्यास में भारतीय नौसेना की ओर से स्वदेशी रूप से निर्मित और निर्देशित मिसाइल विध्वंसक आईएनएस मुंबई शामिल हुआ। अभ्यास के इस संस्करण में ऑस्ट्रेलिया की रॉयल नौसेना, फ्रांसीसी नौसेना, रॉयल नौसेना, संयुक्त राज्य अमेरिका की नौसेना, इंडोनेशिया की नौसेना, मलेशिया की रॉयल नौसेना, सिंगापुर की नौसेना और कनाडा की रॉयल नौसेना शामिल हुईं।
यह अभ्यास समान विचारधारा वाली नौसेनाओं को बेहतर सामरिक अंतर-संचालन के लिए योजना, समन्वय और सूचना साझाकरण में घनिष्ठ संबंध विकसित करने का अवसर प्रदान करता है। इस अभ्यास में सतह युद्ध, वायु-विरोधी युद्ध, वायु-रक्षा, क्रॉस डेक लैंडिंग और सामरिक युद्धाभ्यास सहित जटिल एवं उन्नत बहु-आयामी अभ्यासों के साथ-साथ वीबीएसएस (विजिट, बोर्ड, सर्च एंड सीजर) संचालन जैसे कांस्टेबुलरी मिशन शामिल हुए।
यह अभ्यास भारत के सिक्योरिटी एंड ग्रोथ फॉर ऑल इन द रीज़न ‘सागर’ दृष्टिकोण के अनुरूप है, जिसका उद्देश्य सुरक्षित एवं संरक्षित हिंद-प्रशांत क्षेत्र के लिए समुद्री सहयोग और सहभागिता को बढ़ाना है। ला पेरोस अभ्यास का नेतृत्व फ्रांस द्वारा किया जाता है और यह फ्रांसीसी कैरियर स्ट्राइक ग्रुप (जिसे टीएफ 473 भी कहा जाता है) के इर्द-गिर्द केंद्रित है-जिसे वर्तमान में क्लीमेंश्यो-25 मिशन के लिए तैनात किया गया है।
इसमें भारत के डिस्ट्रॉयर आईएनएस मुंबई के अलावा कनाडा ने हैलिफैक्स-क्लास फ्रिगेट एचएमसीएस ओटावा, यूके ने रिवर-क्लास ओपीवी, एचएमएस स्पे, मलेशिया ने कॉरवेट केडी लेकिर और प्रशिक्षण जहाज केडी गगाह समुदेरा को तैनात किया है। ऑस्ट्रेलिया के विध्वंसक एचएमएएस होबार्ट और अमेरिकी नौसेना के एलसीएस यूएसएस सवाना ने अपने-अपने देशों का प्रतिनिधित्व किया। सिंगापुर ने एलएमवी आरएसएन इंडिपेंडेंस को तैनात किया।
यह अभ्यास दो चरणों में किया गया। पहले 16 से 20 जनवरी तक, दो मुख्य जलडमरूमध्यों मलक्का और सुंडा पर यह केंद्रित था। मलक्का दुनिया के सबसे अधिक उपयोग किए जाने वाले जलडमरूमध्य के रूप में जाना जाता है। यहाँ दुनिया का 50 फीसदी से अधिक समुद्री यातायात केंद्रित है, और इससे जुड़े सुरक्षा मुद्दे भी हैं।
सुंडा जलडमरूमध्य का उपयोग बहुत कम किया जाता है, लेकिन सामरिक दृष्टि से यह कम महत्वपूर्ण नहीं है। यह इंडोनेशियाई जावा और सुमात्रा द्वीपों के माध्यम से हिंद महासागर को दक्षिण चीन सागर से जोड़ता है। दूसरे चरण में, 21 से 24 जनवरी तक, सीएसजी लोम्बोक जलडमरूमध्य में यह अभ्यास हुआ। इस अभ्यास के बाद, फ्रांसीसी स्ट्राइक ग्रुप कुछ दिन के लिए इंडोनेशिया में रुका।
श्रीलंका-भारत अभ्यास
भारत और श्रीलंका के बीच द्विपक्षीय नौसेना अभ्यास, एसएलआईएनईएक्स 24 (श्रीलंका-भारत अभ्यास 2024) का आयोजन 17 से 20 दिसंबर तक विशाखापत्तनम में पूर्वी नौसेना कमान के तत्वावधान में दो चरणों में हुआ। बंदरगाह चरण 17 से 18 दिसंबर तक और समुद्री चरण 19 से 20 दिसंबर तक आयोजित किया गया। भारत की ओर से पूर्वी बेड़े के आईएनएस सुमित्रा ने विशेष बल टीम के साथ इसमें भागीदारी की, जबकि श्रीलंका नौसेना की ओर से अपतटीय गश्ती पोत एसएलएनएस सयूरा ने विशेष बल टीम के साथ भाग लिया।
अभ्यास का उद्घाटन समारोह 17 दिसंबर को हुआ और उसके बाद हार्बर चरण हुआ, जिसके दौरान प्रतिभागियों ने पेशेवर और सामाजिक आदान-प्रदान किया। 19 दिसंबर को शुरू हुए समुद्री चरण में दोनों नौसेनाओं के विशेष बलों द्वारा संयुक्त अभ्यास, गन फायरिंग, संचार प्रक्रियाएं, नाविक कौशल के साथ-साथ नेविगेशन विकास और हेलीकॉप्टर संचालन सम्मिलित थे। दोनों देशों के मध्य द्विपक्षीय अभ्यासों की एसएलआईएनईएक्स श्रृंखला वर्ष 2005 में प्रारंभ की गई थी और तब से नियमित अभ्यास का आयोजन किया जा रहा है।
भारत-मलेशिया
भारत-मलेशिया संयुक्त सैन्य अभ्यास हरिमाऊ शक्ति का चौथा संस्करण दिसंबर से 15 दिसंबर तक आयोजित किया गया। इसमें 78 कर्मियों वाली भारतीय टुकड़ी का प्रतिनिधित्व महार रेजिमेंट की एक बटालियन ने किया। रॉयल मलेशियाई रेजिमेंट की 123 कर्मियों वाली मलेशियाई टुकड़ी ने अपने देश का प्रतिनिधित्व किया। संयुक्त अभ्यास हरिमाऊ शक्ति एक वार्षिक प्रशिक्षण कार्यक्रम है जो भारत और मलेशिया में बारी-बारी से आयोजित किया जाता है। पिछला संस्करण नवंबर 2023 में भारत के मेघालय में उमरोई छावनी में आयोजित किया गया था।
सूर्य किरण
भारतीय सेना की 334 कर्मियों वाली टुकड़ी ने नेपाल के साथ बटालियन स्तरीय संयुक्त सैन्य अभ्यास सूर्य किरण के 18 वें संस्करण में भाग लिया। यह अभ्यास 31 दिसंबर 2024 से 13 जनवरी 2025 तक नेपाल के सलझंडी में आयोजित किया गया। यह वार्षिक प्रशिक्षण कार्यक्रम है जो दोनों देशों में बारी-बारी से आयोजित किया जाता है।
इस अभ्यास में भारतीय सेना की टुकड़ी का नेतृत्व 11वीं गोरखा राइफल्स की एक बटालियन ने किया, वहीं नेपाली सेना की टुकड़ी का प्रतिनिधित्व श्रीजंग बटालियन ने किया। सूर्य किरण अभ्यास का उद्देश्य जंगल में युद्ध, पहाड़ों में आतंकवाद विरोधी अभियानों और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अंर्तगत मानवीय सहायता और आपदा राहत में अंतर-संचालन क्षमता को बढ़ाना है।
सूर्य किरण का यह संस्करण नेपाल के सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी की सफल यात्राओं और नेपाली सेना के सेना प्रमुख जनरल अशोक राज सिगडेल की भारत यात्रा के बाद आयोजित किया गया। यह अभ्यास भारत और नेपाल के सैनिकों को विचारों और अनुभवों का आदान-प्रदान करने, सर्वोत्तम व्यवस्थाओं को साझा करने और एक-दूसरे की परिचालन प्रक्रियाओं की गहरी समझ को बढ़ावा देने के लिए एक मंच प्रदान करेगा।