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एमक्यू-9बी से कोलैबोरेटिव कॉम्बैट विमानों तक: भारत के एयर डोमिनेंस में सहयोग

भारत रक्षा-विकास के महत्त्वपूर्ण दौर में खड़ा है। जटिल भू-राजनीतिक परिस्थितियों से उसका सामना है, जिसमें सीमा पर तनाव, महासागरीय चुनौतियाँ और बहुमुखी खतरे शामिल हैं। विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र और उभरती वैश्विक शक्ति के रूप में भारत को अपनी संप्रभुता की रक्षा करने और विभिन्न क्षेत्रों में अपनी ताकत का प्रदर्शन करने के लिए ‘कटिंग-ऍज सॉल्यूशंस’ की ज़रूरत है।

भारत ने हाल में जनरल एटॉमिक्स एयरोनॉटिकल सिस्टम्स इनकॉरपोरेटेड (जीए-एएसआई) द्वारा विकसित एमक्यू-9बी अनमैन्ड एयरक्राफ्ट सिस्टम (यूएएस) को हासिल किया है, जो इन लक्ष्यों को प्राप्त करने में एक लंबी छलाँग है।

एमक्यू-9बी के रूप में भारत को अपनी श्रेणी के सर्वश्रेष्ठ, बहुमुखी, मल्टी मिशन इंटेलिजेंस, सर्विलांस, और रिकोनेसां (आईएसआर) प्लेटफॉर्म प्राप्त हुए हैं, जिनके साथ ऐसी ट्रेनिंग भी शामिल है, जिसे नए उभरते खतरों का सामना करने के लिहाज से डिजाइन किया गया है।

ये प्लेटफॉर्म, हाल के संघर्षों से प्राप्त नई अवधारणाओं के अनुरूप इनोवेटिव ऑपरेशनल अवधारणाओं को लागू करने में सेतु का काम भी करेंगे। ये अवधारणाएँ हैं, परंपरागत समानव विमानों के साथ मानव-रहित सिस्टम्स को इंटीग्रेट करने की।

जीए-एएसआई की गैम्बिट सीरीज़ जैसे कोलैबोरेटिव कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (सीसीए) की मदद से इंटेलिजेंस की तस्वीर तैयार करने के लिए डिजाइन किए गए सिस्टम्स, सेना को शत्रु की एडवांस्ड एयर डिफेंस को भेदकर उसके संसाधनों को ध्वस्त करने में मदद करते हैं। इससे मित्र सेना को, मानवीय जीवन के नुकसान का सामना नहीं करना पड़ता, और शत्रु पर निर्णायक प्रहार करने का अवसर मिलता है।

दुनियाभर में तैनात जीए-एएसआई के एमक्यू-9बी अपने वर्ग में सबसे उच्चस्तरीय यूएएस हैं।
दुनियाभर में तैनात जीए-एएसआई के एमक्यू-9बी अपने वर्ग में सबसे उच्चस्तरीय यूएएस हैं।

एमक्यू-9बी और सीसीए मिलकर भारत के लिए एक रूपांतरकारी छलाँग साबित होंगे। इससे उसकी सेना को युद्धक्षेत्र की निगरानी करने और एयर सुप्रीमेसी स्थापित करने का अवसर मिलेगा। ये एडवांस्ड प्लेटफॉर्म भारत की तात्कालिक सुरक्षा ज़रूरतों को ही पूरा नहीं करते हैं, बल्कि देश को रक्षा तकनीक में वैश्विक लीडर के रूप में भी स्थापित करते हैं।

एमक्यू-9बी भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा संरचना को सुदृढ़ करेंगे

भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा प्राथमिकताएँ उसके सामने उपस्थित विशिष्ट चुनौतियों से तय होती हैं, जिसमें नाभिकीय-शक्ति से लैस पड़ोसी देशों के साथ सीमा-विवाद, महत्त्वपूर्ण समुद्री सीमाएँ और आंतरिक-सुरक्षा से जुड़ी चिंताएँ शामिल हैं।

अपनी अतुलनीय क्षमता, एडवांस्ड सेंसरों और मल्टी मिशन विशेषता के कारण एमक्यू-9बी इन मामलों के लिए टेलर मेड समाधान हैं:

1.सीमा सुरक्षा और क्षेत्रीय अखंडता

एमक्यू-9बी की 30 घंटे तक प्रचालन की क्षमता भारत के विस्तृत और दुर्गम सीमा क्षेत्रों की निरंतर सर्विलांस करने में समर्थ है। मल्टी-इंटेलिजेंस क्षमता से लैस ये प्लेटफॉर्म, जिसमें इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल/इंफ्रारेड कैमरा शामिल हैं, व्यापक स्तर पर स्थिति पर नज़र रख सकते हैं।

यह बात चीनी सीमा पर वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) और पाकिस्तानी सीमा पर नियंत्रण रेखा पर चल रही गतिविधियों पर नज़र रखने के लिहाज से महत्त्वपूर्ण है, जहाँ रियल-टाइम इंटेलिजेंस घुसपैठ और स्थिति को बिगड़ने से रोक सकती है।

2.मैरीटाइम डोमेन अवेयरनेस

भारत के समुद्री हित हिंद महासागर से जुड़े हैं, जो वैश्विक-व्यापार और ऊर्जा-सुरक्षा की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण क्षेत्र है। एमक्यू-9बी का मैरीटाइम वेरिएंट सीगार्डियन, 360-डिग्री मैरीटाइम रेडार, एक ऑटोमेटिक आईडेंटिफिकेशन सिस्टम और सोनोबुऑय डिस्पेंसर्स से लैस है।

इसके ये फीचर शिपिंग लेन्स की निगरानी करने, अवैध गतिविधियों को पकड़ने और विरोधी नौसैनिक-शक्तियों से संभावित खतरों को काउंटर करने में भारत को समर्थ बनाते हैं।

3.एयरबोर्न अर्ली वॉर्निंग एंड कंट्रोल (एईडब्लू एंड सी)

स्टैल्थी क्रूज़ मिसाइलों, एडवांस्ड जेट विमानों और ड्रोन स्वार्म्स के प्रसार के कारण सुदृढ़ एयरबोर्न अर्ली वॉर्निंग क्षमताओं की ज़रूरत को बढ़ाया है। साब के सहयोग से विकसित एईडब्लू एंड सी मिशन पैकेज के साथ एमक्यू-9बी विमान को हासिल करने से भारत, अपने एयरस्पेस पर उपस्थित खतरों को डिटेक्ट और ट्रैक करने में समर्थ होगा।

यह किफायती समाधान परंपरागत एईडब्लू प्लेटफॉर्मों का पूरक होगा, उनकी पहुँच में काफी वृद्धि करेगा और इससे जुड़े सिस्टम्स का पारस्परिक-संचालन (इंटरऑपरेबिलिटी) सुनिश्चित करेगा। एईडब्लू एंड सी के साथ एमक्यू-9बी उन इलाकों में भी ऑपरेट कर सकेंगे, जो उनके विशाल आकार और महंगे चालक सहित एईडब्लू एंड सी विमान होने के कारण बहुत खतरनाक समझे जाते हैं। इससे एक तरफ मनुष्यों की जीवन-रक्षा होती है और दूसरे शत्रु को छिपने का अवसर नहीं मिलता।

कोलैबोरेटिव कॉम्बैट के लिए ऑटोनॉमस इनोवेशन

जीए-एएसआई की गैम्बिट सीरीज़ ने, ऑटोनॉमस विमानों को मानव-चालित लड़ाकू विमानों के साथ जोड़कर भविष्य की टैक्टिकल एयरपावर तैयार कर दी है।

गैम्बिट सीरीज़ में जीए-एएसआई का गैम्बिट6 नवीनतम चालक रहित फाइटर जेट विमान है, जो एयर-टु-ग्राउंड मिशनों के लिए प्रिसीशन स्ट्राइक क्षमता प्रदान करता है। चित्रकार की कल्पना।
गैम्बिट सीरीज़ में जीए-एएसआई का गैम्बिट6 नवीनतम चालक रहित फाइटर जेट विमान है, जो एयर-टु-ग्राउंड मिशनों के लिए प्रिसीशन स्ट्राइक क्षमता प्रदान करता है। चित्रकार की कल्पना।

एक मॉड्यूलर डिजाइन के आधार पर रचे गए, गैम्बिट विमानों में करीब 70 प्रतिशत कॉमन उपकरण होते हैं, जिससे निर्माण प्रक्रिया आसान हो जाती है और लागत कम हो जाती है। प्लेटफॉर्म में, विशिष्ट मिशनों की जरूरतों के अनुसार कई तरह के वेरिएंट शामिल हैं, जिसमें आईएसआर और एयर-टु-एयर कॉम्बैट से लेकर स्टैल्थ रिकोनेसां और नेवल ऑपरेशंस शामिल हैं।

गैम्बिट के वेरिएंट:

  • गैम्बिट1: लंबे दीर्घकालीन आईएसआर मिशनों के लिए तैयार किया गया, जिसमें फ्यूल-एफिशिएंट इंजन और हाई-आस्पेक्ट विंग्स हैं, ताकि टकराव वाले एयरस्पेस में दीर्घकालीन गश्त की जा सके।
  • गैम्बिट2: शत्रु के विमान को इंगेज करने के लिए एयर-टु-एयर शस्त्रास्त्र से लैस, जिसमें दम-खम की तुलना में कॉम्बैट क्षमता को प्राथमिकता दी गई है।
  • गैम्बिट3: इन्हें ट्रेनिंग के दौरान शत्रु के एयर रोल्स के लिए तैयार किया गया है, जिसमें युद्ध पर लगने वाली ऑपरेशनल लागत को बचाया जा सके।
  • गैम्बिट4: टेल-विहीन डिजाइन के साथ स्टैल्थ कॉम्बैट रिकोनेसां मॉडल, जो टकराव के माहौल में हाई-रिस्क मिशन के लिए उपयुक्त है।
  • गैम्बिट5: इसे कैरियर बेस्ड ऑपरेशंस के लिए तैयार किया गया है, जिसमें टिकाऊपन ज्यादा है और समुद्री मिशनों के लिए कॉम्पैक्ट डिजाइन है।
  • गैम्बिट6: इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर की तरह एयर-टु-ग्राउंड रोल्स पर फोकस्ड, शत्रु के एयर डिफेंस को ध्वस्त करने और डीप प्रिसीशन स्ट्राइक पर ध्यान।

गैम्बिट-सीरीज़ जीए-एएसआई की किफायती, मिशन-टेलर्ड समाधान पेश करने की प्रतिबद्धता को पुष्ट करती है, जो उत्तरजीविता (सर्वाइवैलिटी) और ऑपरेशनल एफीशिएंसी को बढ़ाती है।

कोलैबोरेटिव कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (सीसीए) के विकास में जीए-एएसआई के सहयोग से काम करने पर भारत को अनमैन्ड सिस्टम्स की सीमाओं का विस्तार करने का अवसर और अगली पीढ़ी की एयरपावर के मुख्य प्लेयर की अपनी भूमिका को सुदृढ़ करने का अवसर मिलेगा।

बहुमुखी खतरों का सामना करने के लिए एकजुट शक्ति

एमक्यू-9बी और सीसीए की सच्ची ताकत है, एकजुट शक्ति के रूप में का4य करने की उनकी योग्यता।

ये प्लेटफॉर्म मिलकर ऐसी सुरक्षा-संरचना तैयार करते हैं, जो कई प्रकार के मिशनों को अंजाम देने में काबिल है:

  • एमक्यू-9बी: धरती और समुद्री डोमेन पर निरंतर आईएसआर कवरेज उपलब्ध कराता है, ताकि रियल-टाइम इंटेलिजेंस और प्रिसीशन टार्गेटिंग सुनिश्चित हो सके।
  • सीसीए: फोर्स मल्टीप्लायर का काम करता है, मैगज़ीन डैप्थ (गोला-बारूद की उपलब्धता) बढ़ाता है, सेंसिंग क्षमता में सुधार करता है, और संघर्ष के क्ष्त्र में उत्तरजीविता (सर्वाइवेबिलिटी) बढ़ाता है।
  • इंटरऑपरेबिलिटी: दोनों प्लेटफॉर्म पूरी तरह अमेरिकी और नाटो-स्टैंडर्ड सिस्टम्स के पूरी तरह अनुरूप (कम्पैटिबिल) हैं, जिससे जॉइंट ऑपरेशंस में समन्वय संभव होता है और भारत की बहुपक्षीय रक्षा-पहल को बल मिलेगा।

यह सिनर्जी (तालमेल) इस बात को सुनिश्चित करेगी कि भारत ऑपरेशन नम्यता और लागत-कुशलता बनाए रखते हुए सामने उपस्थित खतरों का सामना प्रभावशाली तरीके से कर सकेगा।

रक्षा-टेक्नोलॉजी लीडर के रूप में भारत की स्थापना

एमक्यू-9बी की खरीद और सीसीए को उनसे जोड़ने का अवसर केवल रणनीतिक निवेश नहीं है, बल्कि इरादों की अभिव्यक्ति है।

दुनिया के सबसे एडवांस्ड यूएएस को तैनात करके भारत ने इनोवेशन से अपनी प्रतिबद्धता और रक्षा तकनीक के क्षेत्र में लीड करने के इरादों का प्रदर्शन कर दिया है।

इतना ही नहीं, जीए-एएसआई की वर्तमान भागीदारी, भविष्य के एडवांसमेंट में और गहरे सहयोग की संभावनाओं को जन्म देकर, भारत के एयरोस्पेस इंडस्ट्री की संवृद्धि को बढ़ावा दे रही है।

भारत का उदीयमान सुरक्षा डॉक्ट्रिन, सभी डोमेन में डेटरेंस, सिचुएशनल अवेयरनेस और ऑपरेशनल फ्लेक्सिबिलिटी पर जोर देता है।

एमक्यू-9बी और सीसीए प्लेटफॉर्म्स, भारत के रणनीतिक-दृष्टिकोण को दृढ़ करते हुए, इन सभी स्तंभों को मजबूत करते हैं। इन कटिंग-ऍज (अत्याधुनिक) तकनीकों पर निवेश करके, भारत अपनी संप्रभुता की रक्षा करेगा और साथ ही हिंद-प्रशांत क्षेत्र में एयर-डोमिनेंस के भविष्य को भी दिशा देगा।

जैसे-जैसे भारत और जीए-एएसआई की भागीदारी में वृद्धि जारी रहेगी, उसके लाभ तात्कालिक ऑपरेशनल जरूरतों से कहीं ज्यादा आगे जाएँगे। साथ-साथ वे दीर्घकालीन इनोवेशन की बुनियाद तैयार कर रहे हैं, स्थानीय क्षमता का विकास कर रहे हैं और भारत को रक्षा तकनीक के वैश्विक-लीडर के रूप में स्थापित कर रहे हैं।