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अंतरिक्ष में युद्ध का खतरा और संरा में रूसी वीटो

हाल ही में रूस ने सभी देशों पर अंतरिक्ष में खतरनाक परमाणु हथियारों को तैनात करने की होड़ पर रोक लगाने सम्बन्धी संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के एक प्रस्ताव पर 24 अप्रैल 2024 को वीटो कर दिया। अमेरिका व जापान द्वारा अंतरिक्ष में सामूहिक विनाश के हथियारों (डब्लूएमडी) पर 1967 की वाह्य अंतरिक्ष संधि की रोक की पुष्टि करने के लिए सं‌युक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव पर रूस के वीटो ने अमेरिका के जो बाइडेन प्रशासन को कथित योजना की आलोचना से मुक्त कर दिया। लगभग छः सप्ताह की बातचीत के बाद अमेरिका और जापान ने आउटर स्पेस ट्रीटी मसौदा प्रस्ताव पर मतदान कराया था। इस पन्द्रह सदस्यीय संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में 13 देशों ने प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया, जबकि रूस ने इसका खुलकर विरोध किया और चीन इस मामले में अनुपस्थित रहा। वास्तव में यह प्रस्ताव सदस्य देशों को परमाणु सहित सामूहिक विनाश के हथियारों को पृथ्वी की कक्षा में स्थापित न करने के लिए बाध्य करता है।

उल्लेखनीय है कि रूस ने इस प्रस्ताव को राजनीति से प्रेरित करार देते हुए इसे खारिज कर दिया और कहा कि यह प्रस्ताव अंतरिक्ष में सभी प्रकार के हथियारों पर प्रतिबन्ध लगाने में उतना सक्षम नहीं है। प्रस्ताव में सभी देशों से अंतरिक्ष में परमाणु हथियार या फिर ऐसे किसी भी हथियार को तैनात नहीं करने का आह्वान किया गया है, जो भारी तबाही अथवा विनाश का कारण बने। अंतरिक्ष में हथियारों की तैनाती 1967 की अन्तरराष्ट्रीय संधि के अन्तर्गत प्रतिबंधित है। अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जेक सुलिवन ने कहा कि जैसा कि अमेरिका, का आकलन व अनुमान है कि रूस परमाणु उपकरण ले जाने वाला एक नया उपग्रह विकसित कर रहा है। हमने रुसी राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन को सार्वजनिक रूप से यह कहते हुए सुना है कि रूस का अंतरिक्ष में परमाणु हथियार तैनात करने का कोई इरादा नहीं है। यदि ऐसा होता तो रूस इस प्रस्ताव पर वीटो नहीं करता। सुरक्षा सलाहकार जेक सुलिवन ने स्पष्ट रूप से बताया कि वीटो किये गये मसौदा प्रस्ताव में सभी 15 सदस्य देशों से विशेष रूप से कक्षा में स्थापित करने के लिए डिजाइन किये गये परमाणु हथियार विकसित न करने का भी आह्वान किया गया था।

अंतरिक्ष में युद्ध
अंतरिक्ष में युद्ध

किसी भी पक्ष द्वारा परमाणु हथियारों को अंतरिक्ष की कक्षा में स्थापित करने से संचार सुविधाओं के साथ-साथ मौसम विज्ञान, कृषि, वाणिज्यिक और राष्ट्रीय सुरक्षा सेवाओं के लिए एक बड़ा संकट खड़ा हो जायेगा। संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी राजदूत लिंडा थामस ग्रीन फील्ड ने सुरक्षा परिषद के सदस्यों से कहा कि इस प्रस्ताव पर वीटो करके रूस ने अपने उत्तरदायित्व को निभाने से अब पल्ला झाड़ लिया  है। अमेरिका-जापान प्रस्ताव ने पहली बार बाहरी आन्तरिक सुरक्षा के मुद्दे को संयुक्त राष्ठ सुरक्षा परिषद के सामने रखा है- यधपि संयुक्त राष्ट्र के अन्य निकायों में दशकों  से इस पर बहस चल रही है। अंतरिक्ष नीति के सहायक सचिव जॉन एफ प्लंब ने हाउस सशस्त्र सेवा समिति की लिखित गवाही में आरोप को दुगना कर दिया है, जो वास्तव में सबसे पहले हाउस के अध्यक्ष प्रतिनिधि माइक टर्नर, आर ओहियों द्वारा लीक किया गया था।

सहायक सचिव जान एफ प्लंब ने लिखा कि” रूस परमाणु उपकरण ले जाने वाले एक नये उपग्रह से सम्बंधित एक नवीन एंटी-सैटेलाइट क्षमता भी विकसित कर रहा है। यह दुनिया भर के देशों और कम्पनियों द्वारा संचालित समस्त उपग्रहों के साथ- साथ महत्वपूर्ण उपग्रह से संबंधित व्यवस्था के लिए एक बड़ा खतरा पैदा कर सकती है, जिन पर हम सभी बहुत अधिक निर्भर है। उन्होंने स्ट्रैटजिक तथा अंतर्राष्ट्रीय अध्ययन केन्द्र को बताया, ” हमारे विश्लेषकों का आकलन है कि परिमाण और स्थान को कक्षा में एक विशेष स्थान पर विस्फोट से निचली पृथ्वी की कक्षा एक निश्चित समय के लिए अनुपयोगी हो जायेगी।” अमेरिकन फिसिकल सोसाइटी की 2022 की रिपोर्ट के अनुसार- विस्फोट ने एक ‘इलेक्ट्रो-मैग्नेटिक पल्स और लम्बे समय तक चलने वाले विकिरण बेल्ट का निर्माण किया, जिसने अन्ततः कक्षा में मौजूद 24 में से आठ को मार डाला, जिसमें यूनाइटेड किंगडम के स्वामित्व वाला एक उपग्रह भी शामिल था।

उल्लेखनीय है कि शीत युद्ध के शुरुआती दिनों के दौरान सोवियत संघ और संयुक्त राज्य अमेरिका दोनों द्वारा पहले भी अंतरिक्ष में परमाणु हथियारों का विस्फोट किया जा चुका है। सबसे बड़ा काम अमेरिका ने वर्ष 1962 में किया था। असफल परीक्षणों की एक श्रृंखला के बाद, अमेरिका ने स्टार फिश प्राइम प्रयोग किया जिसमें समुद्र तल से लगभग 450 किलोमीटर (280 मील) की ऊंचाई पर 1.45 मेगाटन का परमाणु विस्फोट किया गया। 6 मई 2024 को इस वीटो किये गये संयुक्त राज्य अमेरिका / जापान प्रस्ताव पर एक वीटो पहल आयोजित हो रही है। रूस के संयुक्त राष्ट्र राजदूत वासिली नेबेंजिया ने वीटो लगाने के बाद कहा कि अमेरिकी – जापान प्रस्ताव चेरी ने सामूहिक विनाश के हथियार चुने है। उन्होंने कहा कि अगर हम याद करें कि अमेरिका और उनके सहयोगियों ने कुछ समय पूर्व बाहरी अंतरिक्ष में हथियार रखने के खिलाफ संधि के किए 2008 से रुसी-चीनी प्रस्ताव को अवरुद्ध करने का भी आरोप लगाया।

अंतरिक्ष में नाभिकीय अस्त्र
अंतरिक्ष में नाभिकीय अस्त्र

इस अवसर पर अमेरिकी राजदूत थॉमस ग्रीन फील्ड ने रूस पर परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकने के किए वैश्विक संधियों को कमजोर करने, गैर जिम्मेदाराना ढंग से परमाणु बयानबाजी करने, अपने अनेक हथियार नियन्त्रण दायित्वों को दूर जाने और हथियार नियंत्रण या जोखिम में कमी के आस-पास ठोस चर्चा में शामिल होने से इन्कार करने का आरोप लगाया। रूसी मसौदा प्रस्ताव का अधिकांश भाग ठीक अमेरिकी जापान मसौदा प्रस्ताव जैसा ही है, जिसमें अंतरिक्ष में हथियारों की होड़ को रोकने की भाषा भी शामिल है। यह सभी देशों, विशेष रूप से प्रमुख अंतरिक्ष क्षमताओं वाले देशों से बाहरी अंतरिक्ष के शान्तिपूर्ण उपयोग और बाहरी अंतरिक्ष में हथियारों की होड़ पर रोकथाम के लक्ष्य में सक्रिय रूप से योगदान करने का आह्वान करता है। थामस-ग्रीनफील्ड ने स्पष्ट रूप से कहा कि दुनिया अभी अंतरिक्ष में परमाणु विस्फोट के विनाशकारी परिणामों को समझने लगी है।

पृथ्वी से अंतरिक्ष तक मार करने वाले हथियार वर्तमान में सबसे बड़ा खतरा पैदा कर रहे है और इसमें प्रत्यक्ष-आरोहण विरोधी उपग्रह हथियार शामिल है, जिनका संयुक्त राज्य अमेरिका, चीन, रूस तथा भारत ने परीक्षण किया है। इसके साथ ही निर्देशित – ऊर्जा लेज़र और जैमर भी शामिल है। यह सच है कि अंतरिक्ष शान्तिपूर्ण अन्वेषण के लिए एक उत्कृष्ट मंच रहा है, यह सैन्य लाभ प्राप्त करने के लिए एक उत्कृष्ट उच्च क्षेत्र भी है। जासूसी उपग्रहों का उपयोग दशकों से किया जा रहा है। यह निर्विवाद रूप से सत्य है कि जब तक अंतरिक्ष युग अस्तित्व में है, विभिन्न एजेन्सियों ने प्रक्षेपास्त्र प्रक्षेपण या अन्य गतिविधियों के लिए एक मंच के रूप में अंतरिक्ष का उपयोग करने की कल्पना की है। धातु सिलेण्डर रॉकेट का उपयोग पहली बार 18वीं शताब्दी में भारत ने किया था। इसके बाद रॉकेट का उपयोग सीमित तरीके से किया गया।

अनुमान है कि एक परमाणु विस्फोट सीधे तौर पर पृथ्वी पर लोगो को नुकसान नहीं पहुंचायेगा, लेकिन यह अनेक उपग्रहों को नष्ट व निष्क्रिय कर सकता है। जब 1962 में अमेरिका ने अपने स्टार फिश प्राइम परीक्षण के दौरान पृथ्वी की निचली कक्षा में एक परमाणु बम विस्फोट किया था, तो उसके परिणामस्वरुप विकिरण को क्षतिग्रस्त व नष्ट कर दिया था। यदि एन्टी-सेटेलाइट हथियार उपग्रहों को भौतिक रूप से नष्ट करने के बजाय उन्हें जाम कर देता है, तो भले ही इससे भयानक विस्फोट न हो किन्तु इसके दूरगामी परिणाम बेहद संकटपूर्ण सिद्ध होगे। एक अंतरिक्ष हथियार जो सिगनलों को जाम वारने के लिए ईलेक्ट्रानिक युद्ध का उपयोग करता है, उपग्रहों को अप्रभावी रूप से निष्क्रिय किया जा सकता है। जासूसी उपग्रहों, संचार उपग्रहों तथा परमाणु निर्देशित उपग्रहों को निष्क्रिय कर सकता है। प्रश्न यह उठता है कि क्या बाहरी अंतरिक्ष मे परमाणु हथियार सामूहिक विनाश का हथियार है? संयुक्त राज्य अमेरिका और रूस सहित लगभग 114 देशों द्वारा अनुसमथिति संधि, कक्षा में “परमाणु हथियारों या किसी अन्य प्रकार के सामूहिक विनाश के हथियारों की तैनाती या” किसी अन्य तरीके से वाहय अंतरिक्ष में हथियारों की तैनाती पर रोक लगाती है।

अंतरिक्ष में हथियारों की होड़ पर अंकुश लगाने के लिए अमेरिका-जापान के प्रस्ताव को वीटो करने के बद रूस ने संयुक्त राष्ट्र के एक प्रस्ताव को प्रसारित किया है, जिसमें सभी देशों से बाहरी अंतरिक्ष में हर समय हथियार रखने से रोक लगाने के लिए तत्‌काल कार्यवाही करने का आहवान किया है। यह सर्व विदित है कि अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में मानव अनवरत विकास कर रहा है और अब तक हजारों उपग्रह अंतरिक्ष से भेजे जा चुके हैं। एक निश्चित अवधि के बाद उपग्रह काम करना बन्द कर देते हैं और अंतरिक्ष में कचरे की तरह मंडराते है। अनेक बार रॉकेट व उपग्रह के अवशेष वापस पृथ्वी पर गिर जाते है। निसन्देह अंतरिक्ष में फैल रहा इन्सानी कचरा भविष्य में जानलेवा हो सकता है। यदि समय रहते संभले नहीं, तो घातक परिणाम हासिल होगे तथा बडा खतरा बनेंगे एस्टेरायड।

उत्तर कोरिया की हाइपरसोनिक मिसाइल का परीक्षण
उत्तर कोरिया की हाइपरसोनिक मिसाइल का परीक्षण

अंतरिक्ष में प्रमुख रॉकेट जो तैनात है उनमें फैल्कन रॉकेट, स्पेस लांच सिस्टम, सैटर्न-5, न्यू ग्लेन, डेल्टा-4 हैवी, स्पेस शटल तथा वल्कन आदि। अमेरिका का मानव विहीन हाइपरसोनिक क्रूज वेहिकल अंतरिक्ष से दुनिया में कही भी बम गिरा सकता है। अंतरिक्ष तकनीक ने मानव जीवन में जहाँ एक ओर चमत्कारी परिवर्तन किये है, वहीं दूसरी ओर विश्व को भयावह व भीषण संकट की कगार में लाकर खड़ा कर दिया है। अंतरिक्ष में बिखरा कबाड़ एक कील से लेकर बस के आकार के है। प्राकृतिक या किसी भौगोलिक घटना के कारण यदि ये कबाड़ पृथ्वी की तरफ आ गया तो किसी प्रलयंकारी दृश्य से कम नहीं होगा, क्योंकि ये 8 से 10 किमी० प्रति सेकेण्ड की गति से चल रहे है। अंतरिक्ष में जो कचरा है, उसमे 17 प्रतिशत रॉकेट बॉडी, 19 प्रतिशत मिशन आधारित कचरा, 22 प्रतिशत काम न आने वाले अंतरिक्ष यान और 42 प्रतिशत ईधन बैटरी के कचरे है।

अब समय आ गया है जब विश्व के वैज्ञानिक अंतरिक्ष की बढ़ती होड़ पर प्रभावी अंकुश लगाये; अन्यथा अंतरिक्ष विजय मानव सभ्यता हेतु एक बड़ा अभिशाप सिद्ध होगी। अनवरत अंतरिक्ष में बढ़ती होड़ का भय, अविश्वास तथा असुरक्षा का वातावरण दुनिया भर में व्याप्त है, जिसका प्रमुख कारण अंतरिक्ष में प्रक्षेपास्त्र ध्वंसक तथा लेज़र किरण पुंज का उपग्रहों के विरुद्ध प्रयोग किया जाना है। ध्वस्त इन उपग्रहों के मलबे से अंतरिक्ष में लगातार प्रदूषण बढ़ता जा रहा है।

अतः हम सभी को समय रहते सजग, सतर्क एवं  संयमित होने की जरूरत है। ऐसी परिस्थिति में संसार के समस्त वैज्ञानिकों, बुद्धिजीवियों, रणनीतिकारों एवं राजनेताओं  को इस समस्या पर केवल गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता नही है बल्कि अब इस पर लगाम लगाने की प्रबल पहल करनी होगी। मानव जाति के लिए केवल प्रगति ही नहीं, बल्कि उसका अस्तित्व भी इस बात पर निर्भर होगा, कि हम वर्तमान विश्व में व्याप्त खतरों को दूर कर पाने कि शक्ति और साहस जुटा पाते हैं अथवा नहीं। अंतरिक्ष के चक्रव्यूह में फंसे मानव को मुक्ति तभी मिल पाएगी, जब इस संकट पर शीघ्र ही सभी राष्ट्र सामूहिक रूप से प्रभावी पहल करेंगे।