Defence Monitor

मालाबार-2024 सहित महत्वपूर्ण युद्धाभ्यासों का दौर

भारत की सैन्य-डिप्लोमेसी के लिहाज से अक्तूबर और नवंबर के महीने बहुत व्यस्त रहे। इस दौरान सेना के तीनों अंगों ने देश-विदेश में मित्र देशों की सेनाओं के साथ युद्धाभ्यास में भाग लिया और सैन्य आदान-प्रदान कार्यक्रम के तहत सैनिकों और अधिकारियों ने मित्र देशों का दौरा किया और मित्र देशों के सैन्य-अधिकारियों की मेजबानी की।

सैन्य-अभ्यास के लिहाज से सबसे महत्वपूर्ण था चार देशों के क्वॉड समूह-भारत, ऑस्ट्रेलिया, जापान और अमेरिका का ‘अभ्यास मालाबार 2024’, जिसका गत 18 अक्तूबर को विशाखापत्तनम में समापन हुआ। इससे पहले, चारों देशों ने सितंबर में रॉयल ऑस्ट्रेलियाई नौसेना द्वारा आयोजित बहुपक्षीय ‘अभ्यास काकाडू’ में भाग लिया था।

सैन्य अभ्यास मालाबार के इस संस्करण में युद्धपोतों की उनके अभिन्न हेलीकॉप्टरों, लंबी दूरी के समुद्री गश्ती विमानों और पनडुब्बियों के साथ भागीदारी देखी गई। सैनिक प्लेटफॉर्मों ने पानी की सतह, उप-सतह और आकाश में चले जटिल और उन्नत अभ्यासों में हिस्सा लिया। प्रमुख अभ्यासों में सतह से फायरिंग, एंटी-एयर शूट, वायुरक्षा अभ्यास, पनडुब्बी-भेदी अभ्यास, पोतों से हेलीकाप्टरों के व्यापक संचालन, टैंकरों से ईंधन भरने और समुद्री मार्गों पर अवैध गतिविधियों को रोकने और नियंत्रित करने वाली कार्रवाइयों सहित समुद्री युद्ध कौशल के विकास से संबंधित अभ्यास शामिल थे।

8 से 18 अक्टूबर तक आयोजित मालाबार अभ्यास 2024 को भारतीय नौसेना ने अब तक के सभी संस्करणों में सबसे व्यापक बताया, जिसमें जटिल परिचालन गतिविधियों को शामिल किया गया। पहले बंदरगाह चरण विशाखापत्तनम में आयोजित किया गया, उसके बाद बंगाल की खाड़ी में समुद्री चरण आयोजित किया गया। नौसेना ने 19 अक्टूबर को एक बयान में कहा, मालाबार 2024 समुद्री चरण समुद्री क्षेत्र में समझ, सहयोग और जुड़ाव बढ़ाने के लिए भाग लेने वाले देशों की प्रतिबद्धता का प्रमाण है, क्योंकि दुनिया तेजी से जटिल समुद्री सुरक्षा चुनौतियों से जूझ रही है।

इसमें कहा गया है कि 1992 में भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय नौसैनिक अभ्यास के रूप में शुरू हुआ मालाबार अभ्यास एक प्रमुख बहुपक्षीय कार्यक्रम के रूप में विकसित हो गया है, जिसका उद्देश्य अंतर-संचालन क्षमता को बढ़ाना, आपसी समझ को बढ़ावा देना और हिंद महासागर तथा हिंद-प्रशांत क्षेत्र में साझा समुद्री चुनौतियों का समाधान करना है। पनडुब्बी-भेदी युद्ध और समुद्री क्षेत्र जागरूकता क्वाड साझेदारों के बीच प्रमुख फोकस क्षेत्र के रूप में उभरे हैं, क्योंकि उनमें से सभी को चीनी नौसेना के तेजी से विस्तार और हिंद महासागर क्षेत्र में इसके बढ़ते कदमों पर चिंता है।

नौसेना के अनुसार, सैन्य-दलों ने सतह, उप-सतह और हवाई-युद्ध के क्षेत्रों में जटिल और उन्नत अभ्यासों में भाग लिया। प्रमुख अभ्यासों में सतही हथियार फायरिंग, वायु-रोधी शूटिंग, वायु रक्षा अभ्यास, पनडुब्बी-रोधी युद्ध अभ्यास, जहाज-जनित हेलीकॉप्टरों के व्यापक संचालन और टैंकरों से ईंधन भरने और समुद्री अवरोधन संचालन सहित नाविक कौशल विकास शामिल थे। समुद्री चरण का समापन एक समापन समारोह के साथ हुआ जिसमें समुद्री चरण के परिचालन पहलुओं की समीक्षा शामिल थी।

इस संस्करण के लिए, ऑस्ट्रेलिया ने एचएमएएस स्टुअर्ट, एक एन्ज़ैक क्लास फ्रिगेट को अपने एमएच-60आर हेलीकॉप्टर और पी8 समुद्री गश्ती विमान के साथ तैनात किया। जापान ने जेएस अरियाके, एक मुरासामे-क्लास विध्वंसक को भेजा, जबकि अमेरिकी नौसेना ने यूएसएस डेवी, एक अर्ल बर्क-क्लास विध्वंसक को अपने हेलीकॉप्टर और पी8 समुद्री गश्ती विमान को उतारा। अभ्यास में चारों देशों के विशेष बलों ने भी हिस्सा लिया। समुद्री चरण एक समापन समारोह के साथ संपन्न हुआ, जिसमें समुद्री चरण के परिचालन पहलुओं की समीक्षा करना शामिल था और इसने सभी हिस्सा लेने वाले देशों की नौसेनाओं को अनुभव और सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करके आपस में बातचीत करने और विचारों का आदान-प्रदान करने में सक्षम बनाया। भारतीय नौसेना की पनडुब्बियोँ ने उप-सतह युद्ध अभ्यासों में भाग लिया और भाग लेने वाले देशों के विशेष बलों के संयुक्त अभ्यास भी इस चरण में शामिल किए गए।

अभ्यास काकाडू

रॉयल ऑस्ट्रेलियन नेवी द्वारा आयोजित प्रमुख समुद्री अभ्यास काकाडू में 30 देशों के लगभग 3,000 कर्मियों, 10 देशों के जहाजों और पाँच देशों के विमानों ने हिस्सा लिया। ये सभी 9 से 20 सितंबर तक उत्तरी ऑस्ट्रेलियाई अभ्यास क्षेत्र में एकत्र हुए, जिसने कैनबरा की क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय भागीदारी से प्रतिबद्धता को रेखांकित किया। भारतीय नौसेना ने इसके लिए एक पी-8आई एमपीए तैनात किया। काकाडू 24 के अभ्यास निदेशक कैप्टन डेविड टिएट्ज़ेल ने कहा, अभ्यास काकाडू महज एक नौसैनिक अभ्यास नहीं है। यह हमारे क्षेत्र में स्थायी साझेदारी और रणनीतिक एकजुटता का प्रमाण है।

इस अभ्यास में युद्ध से लेकर मानवीय अभियानों तक नौसेना की गतिविधियों का व्यापक दायरा देखने को मिला, जिसमें परिचालन उत्कृष्टता और विस्तारित क्षमताओं का प्रदर्शन किया गया। कैप्टन टिएट्ज़ेल ने एक बयान में कहा, “हमारा लक्ष्य नौसेना प्रशिक्षण की पूरी श्रृंखला का प्रदर्शन करना और नई तकनीकों और रणनीतियों का प्रदर्शन करना है, जो समुद्री अभियानों में सबसे आगे रहने की हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।”

भारत-अमेरिका सहयोग

भारत-अमेरिका सैन्य सहयोग समूह (एमसीजी) की बैठक का 21वां संस्करण 5 से 6 नवंबर तक मानेकशॉ सेंटर, नई दिल्ली में आयोजित किया गया। इस बैठक में क्षमता निर्माण, प्रशिक्षण आदान-प्रदान, रक्षा औद्योगिक सहयोग और पारंपरिक तथा अन्य खतरों से निपटने के लिए तैयारियों को मजबूत करने वाले संयुक्त अभ्यासों की प्रगति सहित कई विषयों पर चर्चा हुई।

बैठक की सह-अध्यक्षता भारत का प्रतिनिधित्व करने वाले चीफ ऑफ इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ लेफ्टिनेंट जनरल जेपी मैथ्यू और अमेरिका का प्रतिनिधित्व करने वाले यूएस इंडो-पैसिफिक कमांड के डिप्टी कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल जोशुआ एम रुड ने की। दोनों देशों के वरिष्ठ अधिकारियों ने इस अवसर पर चल रही पहलों की समीक्षा की और सहयोग के नए क्षेत्रों का पता लगाया।

दोनों पक्षों ने भारत-अमेरिका रक्षा साझेदारी के महत्व पर जोर दिया। दोनों देशों ने सक्रिय जुड़ाव और बढ़ी हुई अंतरसंचालनीयता के माध्यम से इस रणनीतिक रिश्ते को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्धता जताई। उन्होंने हिंद-प्रशांत क्षेत्र के समक्ष आने वाली गतिशील चुनौतियों के विरूद्ध भारत-अमेरिका सैन्य सहयोग के दायरे का विस्तार करने की अपनी प्रतिबद्धता की भी पुष्टि की।

भारत-अमेरिका सैन्य सहयोग समूह एक ऐतिहासिक मंच है जिसका उद्देश्य दोनों देशों के सशस्त्र बलों के बीच रक्षा सहयोग तथा रणनीतिक और परिचालन रक्षा सहयोग को बढ़ावा देना है। भारत-अमेरिका सैन्य सहयोग समूह की यह बैठक क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा सुनिश्चित करने, उभरते खतरों का मुकाबला करने और पारस्परिक क्षमताओं का निर्माण करने के लिए भारत और अमेरिका के साझा उद्देश्यों को आगे बढ़ाने की दिशा में काम करती है।

महासागरका तीसरा संस्करण

उच्च स्तरीय वर्चुअल इंटरैक्शन महासागर का तीसरा संस्करण 5 नवंबर को भारतीय नौसेना द्वारा आयोजित किया गया था, जिसके दौरान नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी ने नौसेनाओं/समुद्री एजेंसियों के प्रमुखों और हिंद महासागर क्षेत्र के तटीय क्षेत्रों के वरिष्ठ नेतृत्व के साथ बातचीत की। इसमें बांग्लादेश, कोमोरोस, केन्या, मैडागास्कर, मालदीव, मॉरिशस, मोज़ाम्बीक, सेशेल्स, श्रीलंका और तंजानिया देश शामिल थे। बातचीत का विषय ‘आईओआर में आम समुद्री सुरक्षा चुनौतियों को कम करने के लिए प्रशिक्षण सहयोग’ था, जो हिंद महासागर क्षेत्र में आम समुद्री चुनौतियों को कम करने की दिशा में प्रशिक्षण निगम के लिए वर्तमान और आवश्यक अनिवार्यताओं पर प्रकाश डालता है।

महासागर यानी मैरीटाइम हैड्स फॉर एक्टिव सिक्योरिटी एंड ग्रोथ फॉर ऑल इन द रीज़न, क्षेत्र में सभी के लिए सक्रिय सुरक्षा और विकास हेतु समुद्री प्रमुखों के बीच उच्च स्तरीय आभासी बातचीत के लिए भारतीय नौसेना का प्रमुख आउटरीच है। भारतीय नौसेना द्वारा शुरू की गई यह पहल द्विवाषिक आधार पर आयोजित की जाती है और 2023 में अपनी शुरुआत के बाद से इसे भाग लेने वाले देशों के बीच व्यापक स्वीकृति मिली है।

वर्तमान संस्करण के दौरान, प्रतिभागियों ने आईओआर में आम समुद्री सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए अपेक्षित क्षमता और कुशल जनशक्ति विकसित करने की दिशा बात की। आईओआर तटवर्ती लोगों के बीच प्रशिक्षण सहयोग के लिए गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण और अवसरों की अनिवार्यता पर भी खुलकर चर्चा हुई।

ऑस्ट्राहिंद

भारत और ऑस्ट्रेलिया की सेनाओं के बीच संयुक्त सैन्य अभ्यास ऑस्ट्राहिंद का तीसरा संस्करण 8 नवंबर को महाराष्ट्र के पुणे में विदेशी प्रशिक्षण नोड में शुरू हुआ। इस अभ्यास का आयोजन 8 से 21 नवंबर तक किया गया। ऑस्ट्राहिंद अभ्यास एक वार्षिक कार्यक्रम है, जिसका आयोजन भारत और ऑस्ट्रेलिया में बारी-बारी से किया जाता है। दिसंबर 2023 में इस अभ्यास के पिछले संस्करण का ऑस्ट्रेलिया में आयोजन किया गया था।

इसमें शामिल 140 कर्मियों वाले भारतीय दल का प्रतिनिधित्व मुख्य रूप से डोगरा रेजिमेंट की एक बटालियन और भारतीय वायुसेना के 14 कर्मियों द्वारा किया गया। 120 कर्मियों वाले ऑस्ट्रेलियाई सेना दल का प्रतिनिधित्व द्वितीय डिवीजन की 10 वीं ब्रिगेड की 13 वीं लाइट हॉर्स रेजिमेंट ने किया।

ऑस्ट्राहिंद अभ्यास का उद्देश्य संयुक्त राष्ट्र अधिदेश के अध्याय सात के तहत अर्ध-रेगिस्तानी इलाकों में अर्ध-शहरी वातावरण में संयुक्त उप-पारंपरिक संचालन के संचालन में अंतर-संचालन क्षमता को बढ़ाकर भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच सैन्य सहयोग को प्रोत्साहन देना है। अभ्यास में उच्च स्तर की शारीरिक फिटनेस, संयुक्त योजना और संयुक्त सामरिक अभ्यास पर ध्यान केंद्रित किया गया।

अभ्यास दो चरणों में आयोजित किया गया। युद्ध की तैयारी और सामरिक प्रशिक्षण चरण और सत्यापन चरण। अभ्यास के दौरान अभ्यास किए गए अभ्यासों/पहलुओं में एक निर्धारित क्षेत्र पर कब्जा करने की आतंकवादी कार्रवाई का उत्तर देना; एक संयुक्त संचालन केंद्र की स्थापना; छापा मारने और तलाशी लेने तथा नष्ट करने जैसे संयुक्त आतंकवाद विरोधी अभियान चलाना; एक हैलिपैड की सुरक्षा करना; ड्रोन का उपयोग और ड्रोन विरोधी उपाय तथा विशेष हेली बोर्न ऑपरेशन आदि शामिल थे।

ऑस्ट्राहिंद अभ्यास ने दोनों पक्षों को सामरिक संचालन करने की रणनीति, तकनीक और प्रक्रियाओं में अपने सर्वोत्तम अभ्यासों को साझा करने में सक्षम बनाया। यह अभ्यास दोनों पक्षों के सैनिकों के बीच भाईचारा और सौहार्द विकसित करने में भी सहायक हुआ है।

सैन्य अभ्यास वज्र प्रहार

भारत और अमेरिका स्पेशल फोर्सेज के संयुक्त सैन्य अभ्यास वज्र प्रहार की 15वीं कड़ी में हिस्सा लेने के लिए भारतीय सेना की टुकड़ी 1 नवंबर को रवाना हो गई। यह अभ्यास 2 से 22 नवंबर तक अमेरिका के इडाहो में ऑर्चर्ड कॉम्बैट ट्रेनिंग सेंटर में आयोजित किया गया। इसी तरह का पिछला  अभ्यास दिसंबर 2023 में उमरोई, मेघालय में आयोजित किया गया। यह भारतीय और अमेरिकी सेना के बीच वर्ष का दूसरा अभ्यास था। पिछला ‘युद्ध अभ्यास 2024’ था, जो सितंबर 2024 में राजस्थान में आयोजित किया गया था।

इस संयुक्त सैन्य अभ्यास में हिस्सा लेने वाली सैन्य टुकड़ियों में प्रत्येक में 45 सैन्यकर्मी शामिल हुए। भारतीय सेना की टुकड़ी का प्रतिनिधित्व स्पेशल फोर्सेज यूनिट्स और अमेरिकी सेना की टुकड़ी का प्रतिनिधित्व अमेरिका की ग्रीन बैरेट्स ने किया। वज्र प्रहार अभ्यास का उद्देश्य अंतरसंचालनीयता, संयुक्त रूप से कार्य करने और विशेष संचालन रणनीति के पारस्परिक आदान-प्रदान को बढ़ाकर भारत और अमेरिका के बीच सैन्य सहयोग को बढ़ावा देना है। यह अभ्यास रेगिस्तान/अर्ध रेगिस्तानी क्षेत्र में किया गया था और इसने विशेष बलों की अभियान संबंधी संयुक्त क्षमताओं को बढ़ाया। यह सैन्य अभ्यास बेहतर शारीरिक फिटनेस, संयुक्त योजना और मिलकर काम करने के सामरिक अभ्यास पर केंद्रित था।

अभ्यास के दौरान संयुक्त टीम मिशन, टोही मिशन, मानव रहित हवाई प्रणालियों का नियोजन, विशेष अभियानों को क्रियान्वित करने, ज्वाइंट टर्मिनल अटैक और विशेष अभियानों में मनोवैज्ञानिक युद्ध संबंधी विधियों पर ध्यान दिया गया।

जर्मन-भारत अभ्यास

भारतीय नौसेना के विध्वंसक आईएनएस दिल्ली, जर्मन नौसेना के फ्रिगेट बाडेन-वुर्टेमबर्ग और टैंकर फ्रैंकफ़र्ट एम मेन ने 21 से 23 अक्तूबर तक हिंद महासागर में एक समुद्री साझेदारी अभ्यास (एमपीएक्स) किया। इन अभ्यासों में क्रॉस डैक फ्लाइंग ऑपरेशन, चल रही पुनर्पूर्ति, फायरिंग और सामरिक युद्धाभ्यास शामिल थे। बंगाल की खाड़ी में भारतीय नौसेना, जर्मन नौसेना के साथ अभिनव समुद्री साझेदारी अभ्यास का उद्देश्य दोनों देशों के बीच समुद्री संबंध और उनके बीच अंतर-क्षमता को और मजबूत करना है।

आईएनएस दिल्ली विध्वंसक मिसाइल अपने वर्ग का प्रमुख जहाज है। यह भारतीय नौसेना के पूर्वी बेड़े का हिस्सा है। बाडेन-वुर्टेमबर्ग जर्मन नौसेना के फ्रिगेट्स के एफ 125 श्रेणी का प्रमुख जहाज है जबकि फ्रैंकफ़र्ट एम मेन जर्मन नौसेना के दूसरे श्रेणी का जहाज है।

मोज़ाम्बीक को दो इंटरसेप्टर सौंपे

हिंद महासागर क्षेत्र के मित्र देशों के साथ अपनी क्षमता निर्माण प्रतिबद्धताओं के एक हिस्से के रूप में, भारत सरकार ने 8 नवंबर को मोज़ाम्बीक सरकार को दो जल-जेट चालित फास्ट इंटरसेप्टर क्राफ्ट (एफआईसी) उपहार में दिए। फास्ट इंटरसेप्टर क्राफ्टों को भारत से आईएनएस घड़ियाल द्वारा भेजा गया। क्राफ्टों को सौंपने के समारोह में मोज़ाम्बीक में भारत के उच्चायुक्त रॉबर्ट शेटकिंटोंग, मापुतो में भारत के नवनियुक्त रक्षा सलाहकार कर्नल पुनीत अत्रि और आईएनएस घड़ियाल के कमांडिंग ऑफिसर कमांडर राजन चिब शामिल हुए। मिनिस्ट्री ऑफ नेशनल डिफेंस के स्थायी सचिव ऑगस्टो कासिमिरो मुइओ ने मोज़ाम्बीक सरकार की ओर से पोतों को औपचारिक रूप से स्वीकार किया।

इन जल-जेट-चालित नौकाओं की अधिकतम गति 45 नॉट है और 12 नॉट पर इनकी रेंज 200 समुद्री मील है। वे पाँच कर्मियों के दल को ले जा सकती हैं और मशीन गन व बुलेट-प्रतिरोधी केबिन से सुसज्जित हैं। दो फास्ट इंटरसेप्टर क्राफ्ट समुद्री आतंकवाद और काबो डेलगाडो प्रांत में चल रहे विद्रोह से निपटने के प्रयास में मोज़ाम्बीक सरकार की सहायता करेंगे। इससे पहले, समुद्री सुरक्षा के लिए मोज़ाम्बीक सरकार के प्रयासों को मजबूत करने के लिए भारत सरकार ने 2019 में दो बड़े इंटरसेप्टर पोत उपहार में दिए थे, इसके बाद जनवरी 2022 में इसी श्रेणी के दो एफआईसी उपहार में दिए गए।

भारत-वियतनाम अभ्यास विनबैक्स

वियतनाम भारतीय द्विपक्षीय सैन्य अभ्यास ‘विनबैक्स 2024’ का 5वाँ संस्करण 4 नवंबर को अंबाला में शुरू हुआ। यह अभ्यास 4 से 23 नवंबर तक अंबाला और चंडीमंदिर में आयोजित किया गया। 2023 में वियतनाम में पहला द्विपक्षीय सैन्य अभ्यास संपन्न हुआ था और भारत और वियतनाम के बीच द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने में एक प्रमुख मील का पत्थर है। इस संस्करण में दोनों देशों की सेना और वायु सेना के कर्मियों द्वारा पहली बार द्विसेवा स्तर की भागीदारी के साथ इसके दायरे में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। भारतीय सेना की टुकड़ी में 47 कर्मी शामिल थे, जिसका प्रतिनिधित्व कोर ऑफ इंजीनियर्स की एक रेजिमेंट के साथ-साथ अन्य शाखाओं और सेवाओं के कर्मियों ने किया। समान क्षमता वाली वियतनामी टुकड़ी का प्रतिनिधित्व वियतनाम पीपुल्स आर्मी के सैनिकों ने किया।

विनबैक्स-2024 का उद्देश्य संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अध्याय 7 के तहत शांति स्थापना अभियानों में संयुक्त राष्ट्र दल के हिस्से के रूप में इंजीनियरिंग कार्यों को करने के लिए इंजीनियर कंपनी और मेडिकल टीमों की तैनाती में दोनों पक्षों की संयुक्त सैन्य क्षमता को बढ़ाना है।

भारत-इंडोनेशिया अभ्यास

भारत-इंडोनेशिया संयुक्त विशेष बल अभ्यास गरुड़ शक्ति 24 के 9 वें संस्करण में भाग लेने के लिए भारतीय सेना की 25 कर्मियों वाली एक टुकड़ी सिजानतुंग, जकार्ता, इंडोनेशिया के लिए रवाना हुई। यह अभ्यास 1 नवंबर से 12 नवंबर तक चला। भारतीय दल का प्रतिनिधित्व पैराशूट रेजिमेंट (विशेष बल) के सैनिकों ने किया तथा इंडोनेशियाई दल का प्रतिनिधित्व इंडोनेशियाई विशेष बल कोपासस के 40 सैनिकों ने किया।

अभ्यास गरुड़ शक्ति 24 का उद्देश्य दोनों पक्षों को एक-दूसरे की संचालन प्रक्रियाओं से परिचित कराना, दोनों सेनाओं के विशेष बलों के बीच आपसी समझ, सहयोग और अंतर-संचालन को बढ़ाना है। इस अभ्यास का उद्देश्य द्विपक्षीय सैन्य सहयोग विकसित करना और सामरिक सैन्य अभ्यासों के अभ्यास और चर्चाओं के माध्यम से दोनों सेनाओं के बीच संबंधों को मजबूत करना है। इस अभ्यास में विशेष अभियानों की योजना बनाना और उन्हें क्रियान्वित करना, विशेष बलों के कौशल को उन्नत करने के लिए उन्मुखीकरण, हथियार, उपकरण, नवाचारों, रणनीति, तकनीक और प्रक्रियाओं के बारे में जानकारी साझा करना शामिल था। संयुक्त अभ्यास गरुड़ शक्ति 24 में जंगल के इलाकों में विशेष बलों के संचालन का संयुक्त अभ्यास, आतंकवादी शिविरों पर हमले और सैन्य सहयोग को प्रोत्साहन देने के लिए दोनों देशों की जीवनशैली और संस्कृति के बारे में जानकारी प्राप्त करने के अलावा बुनियादी और उन्नत विशेष बलों के कौशल को एकीकृत करने वाला एक सत्यापन अभ्यास भी शामिल था।

प्रथम प्रशिक्षण स्क्वाड्रन

फारस की खाड़ी में लंबी दूरी की प्रशिक्षण तैनाती को जारी रखते हुए, आईएनएस तीर और प्रथम प्रशिक्षण स्क्वाड्रन (1टीएस) के आईसीजीएस वीरा 12 अक्टूबर को बहरीन के मनामा बंदरगाह पर पहुँचे। नौसेना सहयोग को बढ़ाने और अंतर-संचालन को बढ़ाने के उद्देश्य से, भारतीय नौसेना समुद्री संचालन और सर्वोत्तम साझा प्रथाओं के विभिन्न क्षेत्रों में रॉयल बहरीन नौसेना बलों (आरबीएनएफ) के साथ जुड़ने के लिए तैयार है। इसके लिए बंदरगाह पर व्यावसायिक बातचीत, क्रॉस शिप विजिट, संयुक्त प्रशिक्षण सत्र, योग सत्र, बैंड संगीत कार्यक्रम, मैत्रीपूर्ण खेल कार्यक्रम, सामाजिक संपर्क और सामुदायिक कल्याण गतिविधियों की योजना बनाई गई है। भारतीय नौसेना के समुद्री प्रशिक्षु आरबीएनएफ की विभिन्न प्रशिक्षण संस्थानों और प्रतिष्ठानों का दौरा कर रहे हैं।

समुद्री भागीदारी अभ्यास की योजना बनाने और उसे संचालित करने के लिए दोनों नौसेनाओं की परिचालन टीमों के बीच समन्वय बैठक भी हुई। सहयोगात्मक जुड़ाव के हिस्से के रूप में सीएमएफ के भागीदारों के साथ प्रशिक्षण बातचीत और क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा की पुष्टि भी इस यात्रा के दौरान होगी।

एक अन्य बंदरगाह यात्रा में, 1टीएस के आईएनएस शार्दूल ने यूएई के दुबई स्थित पोर्ट राशिद में प्रवेश किया। भारतीय दूतावास में रक्षा अताशे और यूएई नौसेना के अधिकारियों ने जहाज का स्वागत किया। यात्रा के दौरान, जहाज यूएई नौसेना के साथ कई प्रशिक्षण गतिविधियों और बंदरगाहों पर बातचीत की।

बहरीन और यूएई में 1टीएस की तैनाती का उद्देश्य न केवल समुद्री प्रशिक्षुओं को विभिन्न नौसेना प्रशिक्षण गतिविधियों से परिचित कराना है, बल्कि सामाजिक-राजनीतिक, सैन्य और समुद्री संबंधों को भी आगे बढ़ाना है। यह यात्रा बहरीन और यूएई के साथ भारत के बढ़ते रक्षा संबंधों का संकेत है, साथ ही समुद्री सुरक्षा सहयोग और नौसेनाओं के बीच बेहतर तालमेल को बढ़ावा देती है।

बहरीन से रवाना

भारतीय नौसेना के प्रथम प्रशिक्षण स्क्वाड्रन (1टीएस)-आईएनएस तीर और आईसीजीएस वीर ने 16 अक्टूबर को मनामा, बहरीन में अपनी लंबी दूरी की प्रशिक्षण तैनाती पूरी की। पत्तन पर रुकने के दौरान, 1टीएस के वरिष्ठ अधिकारी कैप्टन अंशुल किशोर ने मेजर जनरल सलमान मुबारक अल-दोसेरी, रॉयल कमांड स्टाफ और नेशनल डिफेंस कॉलेज और कमांडर अहमद इब्राहिम बुहामूद, कमांडर फ्लोटिला से मुलाकात की और क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा चुनौतियों और प्रशिक्षण और संचालन में भविष्य के सहयोग के अवसरों पर बातचीत की। सीओ आईसीजीएस वीर के साथ वरिष्ठ अधिकारी, 1टीएस ने रॉयल नेवी के कमोडोर मार्क एंडरसन, संयुक्त समुद्री बलों (सीएमएफ) के डिप्टी कमांडर से भी मुलाकात की। समुद्री प्रशिक्षुओं सहित 1टीएस के एक प्रतिनिधिमंडल ने नौसेना सहायता सुविधा, बहरीन का दौरा किया और टास्क फोर्स 59, यूएसएनएवीसीईएनटी और सीएमएफ परिचालनों के बारे में जानकारी प्राप्त की।

यह यात्रा आईएनएस तीर, आईसीजीएस वीर और आरबीएनएस अल फारूक के बीच एमपीएक्स के साथ संपन्न हुई। 1टीएस के पोतों द्वारा यात्रा के सफल समापन से दोनों नौसेनाओं के बीच मजबूत समुद्री संबंधों की पुनः पुष्टि हुई है।

आईएनएस शार्दूल

आईएनएस शार्दूल ने लंबी दूरी की प्रशिक्षण तैनाती के हिस्से के रूप में 16 अक्टूबर को संयुक्त अरब अमीरात में दुबई के पोर्ट रशीद की यात्रा की। यह यात्रा भारत और संयुक्त अरब अमीरात के बीच समुद्री सहयोग को मजबूत करने में एक और महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुई। इस दौरान प्रमुख कार्यक्रम में यूएई नौसेना के साथ बातचीत, क्रॉस ट्रेनिंग विजिट और सामुदायिक आउटरीच गतिविधियां शामिल थीं। आईएनएस शार्दूल के समुद्री प्रशिक्षु नौसेना अधिकारी प्रशिक्षण अकादमी और यूएई नौसेना जहाज के संयुक्त दौरों में शामिल हुए। इससे उन्हें साझा जानकारी और प्रशिक्षण पर पेशेवर बातचीत और चर्चा का अवसर मिला। संयुक्त प्रशिक्षण सत्र में योग और खेल कार्यक्रम यात्रा के अन्य मुख्य आकर्षण थे। आईएनएस शार्दूल पर एक औपचारिक स्वागत समारोह आयोजित किया गया। इसमें यूएई नौसेना के कर्मियों और अधिकारियों, राजनयिकों और भारतीय समुदाय के प्रतिष्ठित लोग शामिल हुए।

दुबई से प्रस्थान पर आईएनएस शार्दूल ने संयुक्त अरब अमीरात के नौसेना जहाज अल कुवैसैट के साथ समुद्री साझेदारी अभ्यास में भाग लिया। दोनों जहाजों ने आपसी समन्वय का प्रदर्शन करते हुए नौसैनिक युद्धाभ्यास, संचार अभ्यास और समन्वित गतिविधियों की एक श्रृंखला को आयोजित की। भारतीय नौसेना जहाज की दुबई यात्रा भारत-यूएई समुद्री संबंधों के महत्व और आईओआर में सागर की दृष्टि के अनुरूप समुद्री क्षेत्र में क्षमता बढ़ाने की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया।

भारत-ओमान अभ्यास नसीम-अल-बहर

आईएनएस त्रिकांड और डॉर्नियर समुद्री गश्ती विमान ने 13 से 18 अक्टूबर तक गोवा के तट पर रॉयल नेवी ऑफ ओमान पोत अल-सीब के साथ भारत-ओमान द्विपक्षीय नौसैनिक अभ्यास नसीम-अल-बहर में भाग लिया। यह अभ्यास दो चरणों में किया गया: 13 से 15 अक्टूबर 24 तक बंदरगाह चरण, उसके बाद समुद्री चरण। बंदरगाह गतिविधियों के भाग के रूप में, दोनों नौसेनाओं के कर्मियों ने विषय वस्तु विशेषज्ञों के आदान-प्रदान और योजना सम्मेलनों सहित पेशेवर बातचीत में भाग लिया। इसके अलावा, खेल कार्यक्रम और सामाजिक कार्यक्रम भी आयोजित किए गए।

16 से 18 अक्टूबर 24 तक आयोजित अभ्यास के समुद्री चरण के दौरान, दोनों जहाजों ने इनफ्लेटेबल लक्ष्यों पर बंदूक से फायरिंग, नजदीकी दूरी के एंटी-एयरक्राफ्ट फायरिंग, युद्धाभ्यास और समुद्री दृष्टिकोण पर पुनर्पूर्ति (आरएएसएपीएस) सहित विभिन्न अभ्यास किए। इंटीग्रल हेलीकॉप्टर ने आईएनएस त्रिकांड से उड़ान भरी और आरएनओवी अल-सीब के साथ क्रॉस-डैक लैंडिंग और वर्टिकल रिप्लेनिशमेंट किया। इसके अतिरिक्त, भारतीय नौसेना के डॉर्नियर विमान ने भाग लेने वाले जहाजों को ओवर-द-होराइज़न टार्गेटिंग डेटा साझा किया। पारस्परिक संचालन को और बढ़ाने के लिए, भारतीय नौसेना के सी राइडर्स ने एक दिन के लिए आरएनओवी अल-सीब पर पोतारोहण किया। इस अभ्यास ने पारस्परिक संचालन को मजबूत करने और एक-दूसरे की सर्वोत्तम प्रणालियों की समझ को बढ़ाने में सहायता की।

भारत-सिंगापुर संयुक्त प्रशिक्षण

पश्चिम बंगाल के कलाईकुंडा वायुसेना स्टेशन पर 21 अक्तूबर को भारतीय वायुसेना और सिंगापुर वायुसेना ने संयुक्त सैन्य प्रशिक्षण अभ्यास के 12वें संस्करण की शुरुआत की। अभ्यास का द्विपक्षीय चरण 13 से 21 नवंबर तक आयोजित किया गया। इसमें एयर कॉम्बेट सिमुलेशन, ज्वाइंट मिशन प्लानिंग और डिब्रीफिंग सत्र हुए। द्विपक्षीय चरण का उद्देश्य अंतर-संचालन क्षमता को बढ़ाना, युद्ध की तैयारी को तेज करना और दोनों वायु सेनाओं के बीच ज्ञान के आदान-प्रदान को बढ़ावा देना है।

सिंगापुर वायुसेना ने अबतक की अपनी सबसे बड़ी टुकड़ी के साथ इसमें भाग लिया। इसमें एफ-16, एफ-15 स्क्वॉड्रन के एयरक्रू और सहायक कर्मी शामिल थे। इसके साथ ही जी-550 एयरबोर्न अर्ली वॉर्निंग एंड कंट्रोल (एईडब्लूएंडसी) और सी-130 विमान भी शामिल थे। अभ्यास में भारतीय वायुसेना ने राफेल, मिराज 2000 आईटीआई, सुखोई-30 एमकेआई, तेजस, मिग-29 और जैगुआर विमानों के साथ भाग लिया।

इस संयुक्त सैन्य प्रशिक्षण का आयोजन दोनों देशों के बीच हस्ताक्षरित द्विपक्षीय समझौते के तहत किया गया है, जो दोनों वायु सेनाओं के बीच बढ़ते पेशेवर सहयोग को दर्शाता है। हवाई संचालन के अलावा, दोनों देशों की वायुसेना के अधिकारियों और कर्मचारियों ने सर्वोत्तम विधियों का आदान-प्रदान किया।

दार-एस-सलाम में आईएनएस सुवर्णा

आईएनएस सुवर्णा ने अदन की खाड़ी में चल रही समुद्री दस्यु-रोधी तैनाती के दौरान आगे जाने से पहले 19 से 21 अक्तूबर तक तंजानिया के दार-एस-सलाम बंदरगाह पर रुककर ऑपरेशनल कार्रवाई संचालित की। इस दौरान कमांडिंग ऑफिसर कमांडर ललित यादव ने तंजानिया पीपुल्स डिफेंस फोर्स (टीडीपीएफ) के नौसैनिक बलों के कमांडर रियर एडमिरल एआर हसन और तंजानिया में भारत के उच्चायुक्त बिश्वदीप डे से भी मुलाकात की। यात्रा के दौरान, दोनों नौसेनाओं की ऑपरेशन टीमों ने पेशेवर कार्यों के संबंध में बातचीत की और विजिट बोर्ड सर्च सीजर, क्षति नियंत्रण और अग्निशमन अभ्यास से संबंधित संयुक्त प्रशिक्षण के साथ-साथ खेलकूद से जुड़े अभ्यास भी संपन्न किए। भारतीय पोत ने तंजानिया पीपुल्स डिफेंस फोर्स (टीपीडीएफ) को इनफेंट्री शस्त्र-प्रशिक्षण सिम्युलेटर भी सौंपा।

अभ्यास सिम्बैक्स

सिंगापुर भारत समुद्री द्विपक्षीय अभ्यास सिम्बैक्स का 31वां संस्करण 23 से 29 अक्टूबर तक आयोजित किया गया। इस अभ्यास में सिंगापुर गणराज्य की नौसेना के आरएसएस टिनेसियस के साथ-साथ भारतीय नौसेना के पूर्वी बेड़े के आईएनएस शिवालिक और लंबी दूरी के समुद्री गश्ती विमान पी8आई ने भाग लिया। 23 से 25 अक्टूबर तक अभ्यास का हार्बर चरण विशाखापत्तनम में आयोजित किया गया, जिसमें विषय से संबंधित विशेषज्ञों के विचारों का आदान-प्रदान, क्रॉस-डैक दौरे, खेल कार्यक्रम और प्री-सेल चर्चाएं शामिल थीं। समुद्री चरण 28-29 अक्टूबर को बंगाल की खाड़ी में आयोजित किया गया। इस अभ्यास में उन्नत एंटी-एयर, एंटी-सरफेस और एंटी-पनडुब्बी अभ्यास, सीमैनशिप अभ्यास और सामरिक युद्धाभ्यास शामिल थे, जिससे दोनों नौसेनाओं के बीच अंतर-संचालन क्षमता और भी बढ़ गई।