Defence Monitor

भारत के आर्थिक विकास में समुद्री-संपर्क की भूमिका

भारतीय नौसेना की तीन दिवसीय वार्षिक शीर्ष स्तरीय क्षेत्रीय रणनीतिक वार्ता ‘हिंद-प्रशांत क्षेत्रीय संवाद-2023’ (आईपीआरडी-2023)  गत 15 से 17 नवंबर तक नई दिल्ली में आयोजित हुआ। पहले दिन उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ‘स्मारक सत्र’ के मुख्य अतिथि थे और वित्त और कॉरपोरेट मामलों की मंत्री निर्मला सीतारमण ने विशेष वक्तव्य दिया।

भारतीय नौसेना के इस वार्षिक शीर्ष-स्तरीय क्षेत्रीय रणनीतिक संवाद में भारत और विदेश के वैश्विक स्तर के प्रसिद्ध विशेषज्ञ, भारतीय सशस्त्र बलों एवं भारत सरकार के वरिष्ठ अधिकारी, विद्वान तथा आम लोग शामिल हुए। भारतीय नौसेना द्वारा आईपीआरडी-2023 का आयोजन अपने प्रबुद्ध भागीदार के रूप में नेशनल मैरीटाइम फाउंडेशन के सहयोग से किया जा रहा है। 2005 में स्थापित, एनएमएफ भारत के अग्रणी समुद्री थिंक-टैंक में से एक है और यह भारत के समुद्री हितों से संबंधित मुद्दों पर अपना शोध केंद्रित करता है। फाउंडेशन ने सभी समुद्री मामलों पर स्वतंत्र, मूल और नीति-प्रासंगिक अनुसंधान के संचालन के लिए महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय ख्याति भी हासिल की है।

संवाद के पहले दिन अपने संबोधन में उपराष्ट्रपति ने कहा कि समुद्र अपनी विशाल आर्थिक क्षमता के कारण वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए नई सीमा के रूप में उभर रहा है। उन्होंने समुद्र और उसकी संपत्तियों पर दावों को चुनौती देने की संभावना को रोकने के लिए एक नियामक व्यवस्था और उसके प्रभावी प्रवर्तन की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि कमजोर स्थिति से शांति की आकांक्षा करना संभव नहीं है इसलिए सभी बुनियादी सिद्धांतों में मजबूत बनने की आवश्यकता है।

अपने संबोधन में, वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि आईपीआरडी ने स्वयं को रायसीना संवाद के समुद्री संस्करण के रूप में स्थापित करके अत्यंत लोकप्रियता हासिल की है। उन्होंने भारत के आर्थिक विकास में समुद्री संपर्क के महत्व पर बल देते हुए भारत-मध्य-पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे के प्रमुख पहलुओं का भी उल्लेख किया जिसकी घोषणा इस वर्ष नई दिल्ली में जी-20 शिखर सम्मेलन में की गई थी।

पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल का वक्तव्य
पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल का वक्तव्य

सीडीएस जनरल अनिल चौहान ने “इंडो-पैसिफिक में समुद्री संपर्क पहल” विषय पर आयोजित पेशेवर सत्र के दौरान अपने आमंत्रण संबोधन में इस क्षेत्र के लिए भारत के दृष्टिकोण और परिप्रेक्ष्य पर आधारित इंडो-पैसिफिक के ऐतिहासिक और समकालीन महत्व का उल्लेख किया। विश्व स्तर पर भारत को जोड़ने में महासागरों के महत्व और सागर (क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा और विकास) एवं स्वच्छ सागर सुरक्षित सागर के माध्यम से सुरक्षा के समग्र दृष्टिकोण पर भी विचार-विमर्श किया गया।

नौसेना प्रमुख एडमिरल आर हरि कुमार ने समुद्री शक्ति के रूप में भारत की बढ़ती शक्ति का उल्लेख किया। नौसेना प्रमुख ने मार्च 2021 में स्वेज नहर में एमवी एवर गिवन के फँसने के कारण पैदा हुए गतिरोध के उदाहरण के माध्यम से समुद्री गलियारों की प्रासंगिकता और सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और भू-राजनीतिक परिवेश पर इसके महत्वपूर्ण प्रभावों पर चर्चा की। उसके कारण वैश्विक स्तर पर 54 अरब डॉलर के व्यापार का अनुमानित नुकसान हुआ। साथ ही, उन्होंने क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा को प्रभावित करने वाले गैर-पारंपरिक सुरक्षा खतरों से निपटने की जरूरत पर भी जोर दिया। हाल ही में संपन्न गोवा मैरीटाइम कॉनक्लेव का उदाहरण देते हुए नौसेना प्रमुख ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारतीय नौसेना की सहयोगी और सहकारी पहलों के संदर्भ में भी जानकारी दी।

इस अवसर पर दिनभर में ‘समुद्री संपर्क के नोड्स’ और ‘हिंद-प्रशांत में समुद्री कनेक्टिविटी पहल’ विषयों पर केंद्रित दो सत्रों का आयोजन किया गया। प्रथम सत्र के दौरान पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के सचिव टीके रामचंद्रन द्वारा जापान, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और भारत के वैश्विक स्तर के जाने-माने प्रतिभागियों के साथ बंदरगाह नेतृत्व आधारित विकास पर केंद्रित विचार-विमर्श किया गया। दूसरे सत्र में सीडीएस ने अपना आमंत्रण संबोधन दिया। इसके पश्चात जापान, केन्या, नेपाल, फिलीपींस, ऑस्ट्रेलिया और जर्मनी के प्रतिष्ठित विशेषज्ञों के साथ एक पैनल चर्चा भी हुई।

दूसरा दिन

दूसरे दिन की गतिविधियां नेशनल मैरीटाइम फाउंडेशन के अध्यक्ष और नौसेना के पूर्व प्रमुख एडमिरल करमबीर सिंह (सेवानिवृत्त) के विशेष संबोधन के साथ शुरू हुईं। एडमिरल करमबीर सिंह ने अपने संबोधन में समुद्री संचालन सहभागिता का एक सूक्ष्म योजना प्रस्तुतीकरण दिया और इसके छह अंतर-संबंधित पहलुओं का विस्तार से उल्लेख किया। उन्होंने नौ परिवहन और बंदरगाह से जुड़ाव के बारे में संभावित प्रगति के भविष्य बारे में चर्चा की। विशेष संबोधन के बाद नौसेना प्रमुख एडमिरल आर हरि कुमार ने ‘हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समग्र समुद्री सुरक्षा के लिए भारत-वियतनाम द्विपक्षीय दृष्टिकोण’ रिपोर्ट जारी की।

पहले सत्र में हुई चर्चा के दौरान, बांग्लादेश, कनाडा, भारत, ब्रिटेन और अमेरिका से आए प्रतिष्ठित वक्ताओं ने विशिष्ट मुद्दों पर विचार-विमर्श में अपनी विशेषज्ञता का उल्लेख किया, जिसमें विशिष्ट मुद्दों पर चर्चा हुई। जिनमें समुद्री बंदरगाहों, नौवहन एवं व्यापार पर चीन के समकालीन व भविष्य के प्रभाव विशेष रूप से हिंद महासागर तथा दक्षिण प्रशांत के द्वीपीय देशों के संबंध में गतिविधि; चेन्नई-व्लादीवोस्तक कॉरिडोर के अवसर, चुनौतियां तथा पूर्वानुमान, ‘फ्लैग्स ऑफ कनवीनिएंस’ बनाम राष्ट्रीय स्वामित्व और फ्लैगिंग का तुलनात्मक विश्लेषण, हिंद महासागर क्षेत्र में जहाज-पुनर्चक्रण की चुनौतियां एवं उनके समाधान शामिल थे। इस सत्र का संचालन प्रोफेसर जेफ्री टिल ने किया।

इस अवसर पर पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने हिंद-प्रशांत क्षेत्रीय संवाद जैसी पहल के माध्यम से भारत में, विशेषकर आबादी के बीच समुद्री विचार को आगे बढ़ाने में भारतीय नौसेना तथा नेशनल मैरीटाइम फाउंडेशन की उत्कृष्ट भूमिका का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2030 तक  भारत को आठ ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने और साल 2047 तक 30 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के सरकार के दृष्टिकोण को उसके समुद्री क्षेत्र में विकास के माध्यम से बड़े पैमाने पर सहायता मिलेगी।

उन्होंने विशेष रूप से सरकार की हरित सागर पहल का उल्लेख किया, जिसमें हरित हाइड्रोजन, हरित बंदरगाह दिशानिर्देश, नवीकरणीय ऊर्जा व जैव विविधता संरक्षण से संबंधित कई नई परियोजनाओं की परिकल्पना की गई है। उन्होंने सागरमाला और अंतर्देशीय जलमार्ग हाल ही में घोषित भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारा, अंतर्राष्ट्रीय उत्तर दक्षिण परिवहन गलियारा तथा पूर्वी समुद्री (चेन्नई-व्लादीवोस्तक) गलियारा जैसी संचालन सहभागिता गतिविधियों का भी जिक्र किया। उन्होंने भारत को इस क्षेत्र में एक प्रमुख जहाज क्रूज केंद्र बनाने के सरकार के दृष्टिकोण के बारे में भी जानकारी दी।

दिन का दूसरा सत्र पिछले सत्र पर आधारित रहा और कई पहलुओं पर अधिक विस्तार से चर्चा की गई। इनमें हिंद महासागर में समुद्री संचालन सहभागिता के अंतर्गत व्यापार तथा नौवहन, रूस-यूक्रेन संघर्ष से समुद्री नौवहन और व्यापार के लिए उभरे सबक, हिंद महासागर क्षेत्र में नौसंचालन एवं समुद्री व्यापार की सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए जिबूती आचार संहिता- जेद्दा संशोधन (डीसीओसी-जेए) व इस समुद्री इलाके में समुद्री सुरक्षा हेतु अवैध समुद्री मामलों पर संपर्क समूह (सीजीआईएमए) के साथ भारत की भागीदारी, हिंद-प्रशांत क्षेत्र में दुर्लभ पृथ्वी तत्वों (आरईई), दुर्लभ धातुओं (आरएम) और ऊर्जा महत्वपूर्ण तत्वों (ईसीई) के संबंध में आपूर्ति श्रृंखला की चुनौतियां तथा श्रीलंकाई परिप्रेक्ष्य से सागरमाला परियोजना की क्षमता जैसे कई बिंदु शामिल थे। इस सत्र का संचालन भारत सरकार के राष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा समन्वयक (एनएमएससी) वीएडीएम जी अशोक कुमार (सेवानिवृत्त) ने किया। इसमें ऑस्ट्रेलिया, जर्मनी, भारत तथा श्रीलंका के प्रतिभागी शामिल थे।

तीसरा दिन

तीसरे और अंतिम दिन में दो सत्र आयोजित किए गए। पहला सत्र ‘हिंद-प्रशांत समुद्री व्यापार और नौवहन की सुरक्षा में निजी उद्योग’ विषय पर केंद्रित था। पूर्व नौसेना प्रमुख, एडमिरल सुनील लांबा (सेवानिवृत्त) द्वारा संचालित इस सत्र में ‘मोज़ाम्बीक चैनल और उसके आसपास नई अपतटीय गैस खोज की ऊर्जा संबंधी संभावनाएं और समुद्री-सुरक्षा के निहितार्थ’ पर एक प्रस्तुति भी शामिल थी।

’नियम-आधारित, सुरक्षित और संरक्षित हिंद-प्रशांत क्षेत्र’ विषय पर आयोजित दूसरे  सत्र में विदेश एवं संस्कृति राज्यमंत्री श्रीमती मीनाक्षी लेखी का विशेष संबोधन हुआ। उन्होंने इस क्षेत्र के ऐतिहासिक महत्व के बारे में बात की और एक समृद्ध समुद्री विरासत से लैस एक प्राचीन सभ्यता के रूप में समुद्र के साथ भारत के अटूट संबंधों पर जोर दिया। उन्होंने भारतीयों की समुद्री क्षमता को पुनर्जीवित करने की आवश्यकता पर जोर दिया, जो विभिन्न कारणों से पिछली कुछ शताब्दियों में क्षीण हो गई थी।

आगे की चर्चाओं का संचालन वाइस एडमिरल बिश्वजीत दासगुप्ता (सेवानिवृत्त) ने किया। इसमें भारत, मलेशिया, सिंगापुर, अमेरिका और वियतनाम के प्रतिष्ठित वक्ताओं ने समसामयिक मुद्दों पर चर्चा की। दिन का अंत भारत में इटली के राजदूत विन्सेन्ज़ो डी लुका के समापन भाषण और आईपीआरडी-2023 का समापन भारतीय नौसेना के नौसेना स्टाफ के उप प्रमुख वाइस एडमिरल तरुण सोबती के समापन भाषण के साथ हुआ।