एक तरफ पश्चिम एशिया में इसराइल और हमास का टकराव चल रहा है, वहीं अदन की खाड़ी और फारस की खाड़ी से लेकर उत्तरी अरब सागर में चीन और पाकिस्तान की नौसेनाओं की गतिविधियाँ बढ़ रही हैं। पिछले कुछ वर्षों में चीन ने पाकिस्तानी नौसेना को खासतौर से उपकरणों और प्लेटफॉर्मों से सजाया है। पाकिस्तानी नौसेना के आधुनिकीकरण में हालांकि तुर्की की भूमिका भी है, पर सबसे बड़ा हाथ चीन का है।
सी गार्डियन-3 अभ्यास
नवंबर के दूसरे सप्ताह में चीन और पाकिस्तान की नौसेनाओं ने अब तक का अपना सबसे बड़ा सी गार्डियन-3 नौसैनिक-अभ्यास किया। इस बात की जानकारी सैटेलाइट तस्वीरों से हुई। दोनों नौसेनाओं के द्विपक्षीय अभ्यास सी गार्डियन-2023 का उद्घाटन 11 नवंबर को कराची स्थित पाकिस्तान नौसेना के डॉकयार्ड में किया गया। यह अभ्यास 17 नवंबर तक चला। चीन के किंगदाओ नौसेना बेस के कमांडर, रियर एडमिरल लियांग यांग और पाकिस्तान फ्लीट के कमांडर वाइस एडमिरल मुहम्मद फैसल अब्बासी इस मौके पर पहुंचे थे। दोनों ने इस साझा अभ्यास को नौसेनाओं के बीच गहरे सामरिक-संबंधों का प्रतीक बताया।
इस अभ्यास के लिए पाकिस्तान के कराची बंदरगाह पर कई चीनी युद्धपोत, पनडुब्बी और जहाज तैनात किए गए थे। अभ्यास के दौरान दोनों देशों की नौसेनाओं ने लाइव फायर ड्रिल किए, जिसका उद्देश्य अपनी समुद्री ताकत को दिखाना है। सी गार्डियन-3 अभ्यास ऐसे समय में हुआ, जब चीन ने हिंद महासागर में अपनी समुद्री मौजूदगी का विस्तार किया है।
कराची में मौजूद चीनी बेड़े में टाइप 039 सॉंग क्लास डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बी भी देखी गई। चीन के पास परमाणु ऊर्जा से चलने वाली तेज आक्रमण पनडुब्बियाँ भी हैं। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि इस अभ्यास में भाग लेने वाले चीनी बेड़े के साथ चीनी परमाणु पनडुब्बी भी तैनात की गई थी या नहीं। अलबत्ता कराची बंदरगाह में चीनी टाइप 039 पनडुब्बी की मौजूदगी के प्रमाण हैं। चीनी बेड़े में एक टाइप 52डी विध्वंसक, दो टाइप 54 फ्रिगेट, एक सबमरीन रेस्क्यू शिप और एक टाइप 903 रिप्लेनिशमेंट ऑयलर भी शामिल था, जो युद्धपोतों और पनडुब्बी को लंबी दूरी से ऑपरेट करने में सहायता करता है। पाकिस्तानी नौसेना के नौ पोतों और पोतों पर तैनात तीन हेलिकॉप्टरों, चार लड़ाकू विमानों और एक समुद्री गश्ती विमान ने इस अभ्यास में भाग लिया।
संयुक्त गश्त
अभ्यास शुरू होने के पहले चीन के रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता, कर्नल वू कियान ने कहा कि अभ्यास के दौरान, चीन और पाकिस्तान पहली बार संयुक्त समुद्री रूप से गश्त करेंगे। कर्नल वू को कहा कि समुद्री सुरक्षा खतरों के लिए संयुक्त प्रतिक्रिया की थीम के साथ, इस अभ्यास में निर्माण आंदोलन, वीबीएसएस (यात्रा, बोर्ड, सर्च और जब्ती), हेलीकॉप्टर क्रॉस-डेक लैंडिंग, सर्च और बचाव, एंटी-सबमरीन ऑपरेशंस शामिल होंगे। इसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच सामरिक-साझेदारी और पारंपरिक दोस्ती को मजबूत करना और दोनों सेनाओं के यथार्थवादी युद्ध प्रशिक्षण को मजबूत करना है। इस साल मई में चीन ने पाकिस्तानी नौसेना को टाइप 054ए/पी गाइडेड मिसाइल फ्रिगेटों की आपूर्ति पूरी कर दी। इसके अलावा चीन पाकिस्तानी नौसेना के लिए हैंगोर क्लास की पनडुब्बियों का निर्माण भी कर रहा है।
2020 में चीनी नौसेना में शामिल हुआ ज़िबो टाइप 052डी श्रेणी का डिस्ट्रॉयर है। यह हवा, सतह और पानी के नीचे के लक्ष्यों पर प्रहार कर सकता है। दुनिया के सबसे बड़े और शक्तिशाली विध्वंसक पोतों में इसको शुमार किया जाता है। इसमें 130 मिमी की तोप के अलावा 32 सेल के दो वर्टिकल लांच सिस्टम (वीएलएस) तैनात हैं, जो एंटी-शिप तथा एंटी-सबमरीन क्रूज़ मिसाइलों को दाग सकते हैं। इसपर पाँच किस्म के रेडार भी लगे हैं।
इसके रेडार स्टैल्थ विमानों को चिह्नित और ट्रैक कर सकते हैं और एकसाथ 24 शॉर्टरेंज मिसाइलों को दागने में मदद कर सकते हैं। प्राप्त रिपोर्टों के अनुसार यह डिस्ट्रॉयर मैक 4 की गति से आ रही 100 में से 96 मिसाइलों को इंटरसेप्ट करके नष्ट कर सकता है। इस तरह से इस पोत को इसी वर्ग के पश्चिमी देशों के पोतों की तुलना में ज्यादा समर्थ और शक्तिशाली माना जा रहा है।
इस पोत पर दुश्मन की पनडुब्बियों को निशाना बनाने वाले टॉरपीडो ट्यूब और एंटी-सबमरीन रॉकेट तैनात हैं। टाइप 052डीएल के विस्तारित हैंगर में एक हेलिकॉप्टर चीन में बना हार्बिन ज़ी-9 या रूसी कामोव केए-28 भी रखा जा सकता है। इसपर चालक दल समेत 280 नौसैनिक सवार हो सकते हैं।
चीन के टाइप 054ए श्रेणी के जिंगज़ू और लिनयी फ्रिगेट मध्यम दर्जे के पोत हैं। चीनी मीडिया के अनुसार इनमें एडवांस शस्त्रास्त्र और सेंसर लगे हैं। ये पोत 32 सेल के वीएलएस से एचक्यू-16 मीडियम रेंज सतह से आकाश पर मार करने वाली मिसाइलों को दाग सकते हैं। इन फ्रिगेटों पर वाईजे-83 (सी-803) सुपरसोनिक एंटी-शिप क्रूज़ मिसाइलें भी तैनात हैं, जो 83 से 250 किलोमीटर तक के हवाई लक्ष्यों को भी ध्वस्त कर सकती हैं। इनपर 165 किलोग्राम तक के परंपरागत वॉरहैड लगाए जा सकते हैं।
आधुनिकीकरण
इस वर्ष सितंबर में पाकिस्तान नेवी ने टाइप 21 के अपने लीड शिप पीएनएस तारिक़ को फॉल्स ऑफ साइकिल नामक संस्था को दान में देकर एक प्रकार से ब्रिटेन और अमेरिका से प्राप्त पोतों के अध्याय को बंद कर दिया। टाइप 21 के पोत पाकिस्तान ने नब्बे के दशक में ब्रिटेन की रॉयल नेवी से खरीदे थे। अब पाकिस्तानी नौसेना चीन, तुर्की और नीदरलैंड्स से नए पोत हासिल करके अपने आधुनिकीकरण के कार्य में जुटी है। इसके अलावा वह अपने डिजाइन के धार पर अपने देश में ही पोत निर्माण का प्रयास कर रही है।
2020 में पाकिस्तानी नौसेना के तत्कालीन चीफ एडमिरल ज़फर महमूद अब्बासी ने घोषणा की थी कि पाकिस्तानी नौसेना संख्या और गुणवत्ता दोनों लिहाज से आधुनिकीकरण की दिशा में आगे बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि हमारी नौसेना के पोतों का छोटा आकार इलाके में हमारे प्रभाव को बढ़ने नहीं देगा। इसलिए हमें अब 50 पोतों से ज्यादा बड़ी नौसेना बनना है। इनमें मल्टी-मिशन फ्रिगेट और कॉर्वेट शामिल होंगे।
उसके बाद से पाकिस्तानी नौसेना ने तुगरिल क्लास (चीनी टाइप 054ए/पी) को चार और बाबर (तुर्की के मिलजैम) वर्ग का एक एंटी-सबमरीन वॉरफेयर कॉर्वेट अपने बेड़े में शामिल किया है। दोनों तुगरिल और बाबर वर्गों के पोत एंटी-सबमरीन और एंटी-शिप क्षमताओं से लैस पूर्ण शिप हैं। दोनों वर्गों के पोतों पर एंटी-सबमरीन ऑपरेशंस के लिए हेलिकॉप्टर भी तैनात हैं।
इन पोतों के अलावा पाकिस्तान ने चार ऑफशोर पैट्रोल वेसल्स (ओपीवी) का भी भी नीदरलैंड्स के डैमेन शिपयार्ड ग्रुप को ऑर्डर दिया है। डैमेन ओपीवी 1900 वर्ग के पहले दो पोतों का आदेश 2017 में दिया गया था, जिन्हें 2020 में पीएनएस यारमुक और पीएनएस ताबुक नाम से कमीशन किया गया। इन ओपीवी को कॉम्बैट के साथ-साथ सर्च एंड रेस्क्यू (सीएसएआर), इंटेलिजेंस, मैरीटाइम सिक्योरिटी, एंटी-सबमरीन तथा एंटी-शिप ऑपरेशंस के लिए लिया गया है। हालांकि एंटी-सबमरीन तथा एंटी-शिप ऑपरेशंस क्षमताएं इनमें युद्ध के समय जोड़ी जा सकती हैं, अन्यथा उनका इस्तेमाल गश्त और समुद्री-पुलिसिंग के लिए किया जाएगा।
एडमिरल अब्बासी ने अक्तूबर 2020 में कहा था कि हमारा और ज्यादा बड़े छह अतिरिक्त ओपीवी हासिल करने का इरादा है। इसके कुछ समय बाद पाकिस्तानी नौसेना ने डैमेन ओपीवी 2600 श्रेणी को दो और पोत खरीदने के सौदे पर दस्तखत किए। ओपीवी 1900 की तरह इनमें भी एंटी सबमरीन और एंटी-शिप क्षमताएं हैं, साथ ही इनमें वीएलएस के मार्फत हवाई रक्षा-प्रणाली भी है। पाकिस्तानी नौसेना ने चार और ओपीवी हासिल किए और इस तरह उसके पास इस श्रेणी के आठ पोत हो गए, जिनमें से छह में मल्टी-मिशन क्षमताएं हैं।
पाकिस्तानी नौसेना के फ्लीट-विस्तार कार्यक्रम में जिन्ना क्लास के फ्रिगेट हैं, जो वह तुर्की की मदद से बना रहा है। इसके निर्माता कराची शिपयार्ड्स एंड इंजीनियरिंग वर्क्स (केएसईडब्लू) के अनुसार 3,300 टन विस्थापन वाले इस पोत की लंबाई 119 मीटर और चौड़ाई 15 मीटर होगी।
समुद्री सतह के अलावा सतह के नीचे के प्लेटफॉर्मों पर भी पाकिस्तानी नौसेना अपने आधुनिकीकरण और विस्तार पर ध्यान दे रही है। 2015 में पाकिस्तानी नौसेना ने 4-5 अरब डॉलर की लागत से चीन से इंडिपेंडेंट एयर प्रोपल्शन (एआईपी) युक्त आठ पनडुब्बियाँ खरीदने का सौदा किया। समझौते के अनुसार पहली चार पनडुब्बियाँ चीन से बनकर आएंगी और चार पाकिस्तान में ही केएसईडब्लू में बनेंगी। पाकिस्तानी नौसेना को सभी आठ पनडुब्बियाँ 2028 तक प्राप्त हो जाने का कार्यक्रम है। हैंगोर वर्ग की इन पनडुब्बियों में से पहली को 2023 में आ जाना चाहिए था, पर जर्मनी ने इनके लिए एमटीयू-396 इंजन देने से इनकार कर दिया, इसलिए इनकी आपूर्ति में विलंब हो रहा है।
अब बताया जा रहा है कि इनमें चीन में निर्मित सीएचडी620 इंजन लगाया जाएगा। हैंगोर क्लास की पनडुब्बियों में स्टर्लिंग एआईपी लगा होगा, जो एस26 वर्ग की चीनी पनडुब्बियों में लगा होता है। हालांकि इन पनडुब्बियों के बारे में अधिकृत रूप से बहुत ज्यादा विवरण प्राप्त नहीं हैं, पर माना जाता है कि एस26 क्लास की पनडुब्बियाँ टाइप 039ए/041 का एक्सपोर्ट वेरिएंट है। संभवतः यह पनडुब्बी बाबर-3 सबमरीन लांच्ड क्रूज़ मिसाइल (एसएलसीएम) को दागने में समर्थ है। इन आठ पनडुब्बियों के अलावा पाकिस्तान के पास अगोस्टा 90बी क्लास की तीन पनडुब्बियाँ हैं, जिन्हें सेंसरों और अन्य सिस्टम्स से अपग्रेड किया गया है। इस प्रकार उसके पास 11 पनडुब्बियाँ हो जाएंगी। हालांकि पाकिस्तान के पास भारत की तुलना में संख्या के लिहाज से कुछ कम पनडुब्बियाँ होंगी, पर भारत के समुद्री तट के आकार को देखते हुए उसका पनडुब्बी बल अपेक्षाकृत सबल होगा।
भारत को अपने पुराने बेड़े के कारण इस समय पनडुब्बियों की खास जरूरत है। भारत के द्वीपों पर पहरा बढ़ाने के लिए भारतीय नौसेना को कम से कम 24 सबमरीन की आवश्यकता है। लेकिन, मौजूदा समय में भारत के पास सिर्फ 16 सबमरीन है। इस बेड़े में स्कोर्पिन श्रेणी की छह पनडुब्बियों को छोड़ दें तो शेष की उम्र 30 साल से ऊपर है। आने वाले समय में इनमें से ज्यादातर सेवामुक्त होती जाएंगी। हिंद महासागर में चीन की बढ़ती गतिविधियों के देखते हुए भारत की जरूरतें बढ़ती जा रही हैं।
भारतीय नौसेना की पनडुब्बी आईएनएस सिंधुध्वज 35 साल के शानदार कार्यकाल के बाद पिछले साल 16 जुलाई को कार्यमुक्त हो गई। इस पनडुब्बी को 1986 में भारतीय नौसेना में शामिल किया गया था। फरवरी 1999 में सुरक्षा से जुड़ी कैबिनेट कमेटी ने 30 वर्ष की एक योजना बनाई थी, जिसके अंतर्गत प्रोजेक्ट-75 और 75-आई के अंतर्गत 12 पनडुब्बी बननी थीं। इन दोनों परियोजनाओं का उद्देश्य यह था कि विदेशी तकनीक की मदद से भारत में पनडुब्बी निर्माण का आधार तैयार कर लिया जाए, ताकि 2030 तक ऐसी स्थिति बन जाए कि हम स्वदेशी पनडुब्बियाँ तैयार करने लगें। बहरहाल भारतीय-कार्यक्रम एक अलग विषय है, पर खासतौर से हिंद महासागर में चीन-पाक गठजोड़ को देखते हुए, पाकिस्तानी नौसेना के विस्तार की अनदेखी नहीं की जा सकती।

