Defence Monitor

भारत-अमेरिका सामरिक-सहयोग और युद्धाभ्यास

भारत और अमेरिका की सेनाएं समुद्र, हवा और ज़मीन पर युद्ध की स्थिति में एक-दूसरे के साथ समन्वय के लिए लगातार अभ्यास कर रही हैं। नवीनतम युद्धाभ्यास इन दिनों अमेरिका के फोर्ट वेनराइट, अलास्का में चल रहा है, जो 8 अक्तूबर तक चलेगा। दोनों देशों के बीच ‘एक्सरसाइज युद्ध अभ्यास’ का यह 19वां संस्करण है, जो गत 25 सितंबर को शुरू हुआ। भारतीय सेना और अमेरिकी सेना द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित यह वार्षिक अभ्यास है। अभ्यास का पिछला संस्करण नवंबर 2022 में भारत के उत्तराखंड के औली में आयोजित किया गया था।

नौसेनाध्यक्ष अमेरिका में

इस दौरान भारतीय नौसेना के प्रमुख एडमिरल आर हरि कुमार ने 19 से 22 सितंबर तक अमेरिका में आयोजित 25 वीं अंतर्राष्ट्रीय समुद्री शक्ति संगोष्ठी (आईएसएस) में भाग लिया। अंतर्राष्ट्रीय समुद्री शक्ति संगोष्ठी (आईएसएस)का आयोजन अमेरिकी नौसेना द्वारा यूएस नेवल वॉर कॉलेज, न्यूपोर्ट, रोड आइलैंड में किया जाता है और भारत-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सहयोग बढ़ाने के साझा दृष्टिकोण की दिशा में विदेशी मित्र देशों (एफएफसी) के साथ जुड़ने का अवसर प्रदान करता है।

नौसेना प्रमुख एडमिरल आर हरि कुमार ने आईएसएस आयोजन के अवसर पर अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, मिस्र, फिजी, इजरायल, इटली, जापान, केन्या, पेरू, सऊदी अरब, सिंगापुर और ब्रिटेन सहित विभिन्न देशों के अपने समकक्षों के साथ द्विपक्षीय वार्ता भी की। इस यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच बढ़ते सामरिक-सहयोग से जुड़े विषयों पर गहराई से विमर्श किया गया।

नौसैनिक-सहयोग

भारतीय नौसेना के प्रवक्ता कमांडर विवेक मधवाल ने बताया कि नौसेनाध्यक्ष की यह यात्रा द्विपक्षीय सहयोग को बढ़ाने और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोगी देशों के साथ समन्वय को बढ़ाने की दिशा में एक कदम है। राजकीय यात्रा के दौरान आयोजित व्यापक कार्यक्रम स्वतंत्र खुले और समावेशी भारत-प्रशांत क्षेत्र एवं अंतर्राष्ट्रीय नियम आधारित व्यवस्था के विजन को साकार करने की दिशा में भारतीय नौसेना की दृढ़ता का प्रदर्शन है।

यात्रा के दौरान मालाबार, रिम्पैक, सी ड्रैगन और टाइगर ट्रायम्‍फ जैसे द्विपक्षीय और बहुपक्षीय अभ्यासों में भारतीय नौसेना और अमेरिका की नौसेना के परिचालन के जुड़ाव की खोज की दिशा में व्यापक विचार-विमर्श किया गया। रिम ऑफ द पैसिफिक एक्सरसाइज (रिम्पैक) को दुनिया का सबसे बड़ा सैन्य-अभ्यास माना जाता है। इसका आयोजन अमेरिका की प्रशांत कमांड करती है। विभिन्न क्षेत्रों में पारस्परिकता को संस्थागत बनाने के लिए दोनों नौसेनाओं के बीच नियमित विषय वस्तु विशेषज्ञ आदान-प्रदान भी होता है।

भारत की पहल

आईएसएस आयोजन के अवसर पर नौसेना प्रमुख ने प्रशिक्षित कर्मियों की भर्ती और प्रतिधारण के विशेष संदर्भ में मानव संसाधन प्रबंधन की चुनौतियों, अग्निपथ योजना, महिलाओं को सशक्त बनाने और भारतीय नौसेना को लिंग-तटस्थ बल में चलाने की दिशा में भारत की पहल के बारे में विस्तार से बात की।

नौसेना प्रमुख की अमेरिका की यात्रा ने द्विपक्षीय सहयोग को गहरा करने के साथ-साथ हिंद-प्रशांत क्षेत्र में विविध भागीदारों के साथ जुड़ने हेतु नौसेना से नौसेना की शीर्ष स्तर की भागीदारी के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर प्रदान किया। जून 2016 में अमेरिका ने भारत को ‘मेजर डिफेंस पार्टनर’ घोषित किया था। इस प्रकार दोनों देशों के बीच सामरिक-सहयोग के रास्ते खुले हैं।

सामरिक-सहयोग

अमेरिका अपने रक्षा सहयोगियों के साथ चार बुनियादी समझौते करता है। पहला जनरल सिक्योरिटी ऑफ मिलिटरी इनफॉर्मेशन एग्रीमेंट (जीएसओएमआईए), जो दोनों देशों के बीच सन 2002 में हो गया था। इसके बाद 2016 में लॉजिस्टिक्स एक्सचेंज मेमोरेंडम ऑफ एग्रीमेंट (लेमोआ) हुआ। फिर 2018 में कोमकासा पर दस्तखत हुए। अक्तूबर 2020 में चौथा समझौता बेसिक एक्सचेंज एंड कोऑपरेशन एग्रीमेंट (बेका) हुआ।

इन समझौतों की भूमिका जुलाई 2005 में सामरिक सहयोग की घोषणा से जुड़ी है, जिसकी एक परिणति 2008 के नाभिकीय समझौते के रूप में हुई। 2005 का सामरिक सहयोग का समझौता दस साल के लिए था, जिसे 2015 में दस साल के लिए बढ़ा दिया गया था। इसमें 2012 में हुई तकनीकी सहयोग की पहल डिफेंस टेक्नोलॉजी एंड ट्रेड इनीशिएटिव (डीटीटीआई) शामिल है। 2016 में अमेरिका ने भारत को मेजर डिफेंस पार्टनर (एमडीपी) घोषित किया। 2018 में भारत की संस्था इनोवेशन फॉर डिफेंस एक्सेलेंस (आईडेक्स) और अमेरिका की डिफेंस इनोवेशन यूनिट के बीच तकनीकी सहयोग का समझौता हुआ।

इस साल जून में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अमेरिका-यात्रा के बाद परिस्थितियाँ तेजी से बदली हैं। जिस प्रकार के समझौते अमेरिका में हुए, वे एक दिन में नहीं होते। उनकी लंबी  पृष्ठभूमि होती है। प्रधानमंत्री की यात्रा के कुछ दिन पहले अमेरिकी रक्षामंत्री लॉयड ऑस्टिन भारत आए थे। उनके साथ बातचीत के बाद काफी सौदों की पृष्ठभूमि तैयार हो चुकी थी। जनवरी में भारत के रक्षा सलाहकार अजित डोभाल और अमेरिकी रक्षा सलाहकार जेक सुलीवन ने इनीशिएटिव फॉर क्रिटिकल एंड इमर्जिंग टेक्नोलॉजी (आईसेट) को लॉन्च किया था।

युद्धाभ्यास

अमेरिका के फोर्ट वेनराइट, अलास्का में चल रहे युद्धाभ्यास में भारतीय सेना के 350 कर्मियों की एक टुकड़ी भाग ले रही है। मराठा लाइट इनफेंट्री रेजिमेंट से जुड़ी एक बटालियन इस अभ्यास में भारतीय सेना का नेतृत्व कर रही है। अमेरिका की ओर से पहली ब्रिगेड कॉम्बैट टीम की 1-24 इनफेंट्री बटालियन भाग ले रही है।  दोनों देशों के सैन्य बल संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों में सहयोग बढ़ाने के लिए आवश्यक सामरिक अभ्यासों की एक श्रृंखला का अभ्यास भी कर रहे हैं। साथ ही दोनों पक्षों के भाग लेने वाले सैन्य अधिकारी आपसी अनुभव और सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करने के लिए विस्तृत चर्चा कर रहे हैं। अभ्यास की अवधारणा संयुक्त राष्ट्र शासनादेश के भाग 7 के तहत ‘पर्वतीय रेंज/अत्यंत प्रतिकूल मौसम स्थितियों में एकीकृत लड़ाकू टीमों की तैनाती’ है।

कमांड पोस्ट अभ्यास और चयनित विषयों पर विशेषज्ञों द्वारा शैक्षिक वार्ता भी इस कार्यक्रम का हिस्सा है। फील्ड प्रशिक्षण अभ्यास में ब्रिगेड स्तर पर दुश्मन बलों के खिलाफ एकीकृत युद्ध समूहों की पहचान, ब्रिगेड/बटालियन स्तर पर एकीकृत निगरानी ग्रिड, हेलीबोर्न/एयरबोर्न और फोर्स मल्टीप्लायरों की तैनाती, संचालन के दौरान रसद और हताहत प्रबंधन की पुष्टि, निकासी और युद्ध चिकित्सा सहायता और ऊंचाई वाले क्षेत्रों और अत्यंत प्रतिकूल मौसम स्थितियों की स्थिति में लागू अन्य पहलुओं की पुष्टि शामिल है।

इस अभ्यास में विचारों के आदान-प्रदान और सर्वोत्तम अभ्यास जैसे युद्ध इंजीनियरिंग, बाधा निवारण, बारूदी सुरंग और इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइसेस सहित युद्ध कौशल की एक विस्तृत श्रृंखला को भी शामिल किया गया है। एक्सरसाइज युद्ध अभ्यास-23 से दोनों सेनाओं को एक-दूसरे से सीखने में मदद मिलेगी और दोनों सेनाओं के बीच संबंध मजबूत होंगे।

डिफेंस मॉनिटर ब्यूरो