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पाक-चीन गठजोड़ को देखते हुए पाँचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान कार्यक्रम में तेजी

‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान भारतीय वायुसेना ने आक्रमण और बचाव दोनों मामलों में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। हालाँकि भारतीय वायुसेना के सामने लड़ाकू विमानों की संख्या को लेकर चुनौतियाँ हैं, पर उनका कोई असर तीन दिन की इस लड़ाई में दिखाई नहीं पड़ा। अलबत्ता इस बात की माँग बढ़ी है कि हमें अपने लड़ाकू विमानों के कार्यक्रम में तेजी लाने की ज़रूरत है। कुछ महीने पहले सोशल मीडिया पर चीन के छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमानों के बारे में जो चर्चा हुई उसके बाद भारतीय रक्षा-विशेषज्ञों ने कई तरह से चिंता व्यक्त की है। इस चिंता के साथ ही भारत के एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (एम्का) की प्रगति को लेकर बातें शामिल थीं। इस बीच खबरें आईं कि पाकिस्तानी वायुसेना ने चीन से छठी पीढ़ी के जे-35 लड़ाकू विमान को खरीदने का फैसला किया है।

26 दिसंबर, 2024 को सोशल मीडिया पर वीडियो और तस्वीरें सामने आईं, जिनमें दो नए चीनी लड़ाकू विमान उड़ान भरते हुए दिखाई दिए। इनमें चेंगदू एयरक्राफ्ट कॉरपोरेशन का ट्राई-जेट टेललेस फ्लाइंग विंग डिज़ाइन और शेनयांग एयरक्राफ्ट कॉरपोरेशन का क्रैंक्ड एरो कॉन्फ़िगरेशन वाला एक और विमान शामिल था, जिसे अस्थायी रूप से शेनयांग जे-50 नाम दिया गया है।

हालांकि, व्यापक मीडिया कवरेज के बावजूद, चीनी सेना या रक्षा उद्योग की ओर से इन विमानों को छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमान के रूप में स्वीकार करने की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। अलबत्ता मीडिया में इन्हें छठी पीढ़ी के विमान के रूप में देखा गया। बहरहाल कई बातें इन दावों की प्रामाणिकता पर संदेह पैदा करती हैं।

चीन का यह रहस्यमय विमान एक बार फिर से प्रकट हुआ। इसका नाम जे-36 बताया जा रहा है। मीडिया स्रोतों के अनुसार इस टेललेस स्टैल्थ फाइटर ने हाल ही में 17 मार्च को अपनी दूसरी उड़ान परीक्षण पूरी की है। इसबार इसके साथ कोई दूसरा विमान पीछा नहीं कर रहा था। 17 मार्च को हुई नवीनतम परीक्षण उड़ान के हालिया फुटेज और चित्र, जे-36 की अनूठी डिजाइन विशेषताओं को दर्शाते हैं, जिसमें मिश्रित डबल डेल्टा विंग विन्यास और डॉरसल एयर इनटेक साथ सुव्यवस्थित फ्यूजलेज शामिल है। ये विशेषताएँ उन्नत स्टैल्थ क्षमताओं का संकेत देती हैं।

हालांकि बीजिंग ने आधिकारिक तौर पर विमान या इसके इच्छित उपयोग के बारे में विवरण की पुष्टि नहीं की है, लेकिन इसकी विशेषताएं छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमानों से अपेक्षित विशेषताओं के अनुरूप हैं, जो आमतौर पर स्टैल्थ, उन्नत सेंसर और मानव रहित प्रणालियों के साथ एकीकरण पर जोर देते हैं।

यह प्रचारात्मक-वीडियो भी हो सकता है। दिसंबर में जब तस्वीर आई थी, तब विशेषज्ञों ने कही कि परीक्षण उड़ानें आमतौर पर नियंत्रित वातावरण में की जाती हैं, न कि आबादी वाले क्षेत्रों में। ये विमान इमारतों के ऊपर कम ऊँचाई पर उड़ते हुए दिखाई पड़े थे, जिससे संदेह पैदा हुआ। असत्यापित स्रोतों, असामान्य उड़ान स्थितियों और आधिकारिक पुष्टि के अभाव के कारण यह धारणा बनी है कि चीन के छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमानों की खबरें सोशल मीडिया पर फैलाई गई झूठी खबरें हैं।

चीन सरकार फौजी तकनीक का खुलासा करने के मामले में सावधानी बरतती  है। वे छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमान को इतने खुले तौर पर उजागर करेंगे, इसकी उम्मीद चीन से नहीं की जाती। माओत्से तुंग के जन्मदिन पर वीडियो जारी किए जाने के कारण कुछ लोगों ने इसकी प्रामाणिकता को लेकर अटकलें लगाईं, क्योंकि इसे प्रतीकात्मक संकेत के रूप में देखा गया। पर अब दूसरी बार इन तस्वीरों का आना कोई संकेत दे भी रहा है।

पिछली बार ‘ग्लोबल टाइम्स’ और ‘शिनहुआ’ जैसे चीनी मीडिया आउटलेट्स ने इसकी पुष्टि नहीं की थी। इस बार 17 मार्च को ‘ग्लोबल टाइम्स’ ने इस खबर को प्रकाशित करते हुए लिखा, सोमवार को सोशल मीडिया पर वीडियो और तस्वीरों के अनुसार, पिछले साल दिसंबर में पहली बार दिखाई देने वाले कथित छठी पीढ़ी के चीनी लड़ाकू विमान ने हाल में एक और उड़ान परीक्षण किया है। एक चीनी सैन्य मामलों के विशेषज्ञ ने कहा कि अगर फुटेज प्रामाणिक है, तो यह दिखाता है कि नए विमान के उड़ान परीक्षण सुचारू रूप से आगे बढ़ रहे हैं।

 

सिना वीबो पर एक वीडियो को सैन्य मामलों की लोकप्रिय चीनी पत्रिका नेवल एंड मर्चेंट शिप्स द्वारा फिर से पोस्ट किया गया था, जिसने अपने मार्च संस्करण के लिए चीन के छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमानों के बारे में एक कवर स्टोरी भी चलाई थी। चीनी सैन्य मामलों के विशेषज्ञ सोंग झोंगपिंग ने ‘ग्लोबल टाइम्स’ को बताया कि अगर फुटेज प्रामाणिक साबित होती है, तो इसका मतलब होगा कि नया विमान कम अंतराल में परीक्षण उड़ानों के साथ सुचारू रूप से आगे बढ़ रहा है।

एम्का में तेजी

दिसंबर की फुटेज सामने आने के बाद भारत के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ और दूसरे पर्यवेक्षकों ने छठी पीढ़ी के इन लड़ाकू विमानों के अस्तित्व के बारे में संदेह व्यक्त किया था और कहा था कि कई देश अभी ऐसे कार्यक्रमों के प्रारंभिक चरण में हैं। बहरहाल, चीनी विमान की सत्यता अपनी जगह है, पर हाल में खबरें मिली हैं कि पाकिस्तान और चीन से उभरते खतरों के जवाब में भारत अपने स्वदेशी पाँचवीं पीढ़ी के स्टैल्थ फाइटर जेट, एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट के विकास में तेजी ला रहा है। यह कदम एक शीर्ष-स्तरीय समिति द्वारा संचालित किया जा रहा है जिसका उद्देश्य दक्षता में सुधार करके और निजी क्षेत्र की अधिक भागीदारी को शामिल करके परियोजना को गति देना है। इस बीच, पाकिस्तान चीन से कम से कम 40 जे-35ए पाँचवीं पीढ़ी के स्टैल्थ जेट खरीदने की योजना बना रहा है। चीन ने पहले ही भारत की सीमाओं के पास स्थित हवाई ठिकानों जैसे कि होटन और शिगात्से पर अपने चेंगदू जे-20 स्टैल्थ लड़ाकू विमानों को तैनात कर दिया है।

क्षेत्रीय सुरक्षा चिंताओं के बढ़ने के साथ ही भारत की एम्का परियोजना में तेज़ी लाने की ज़रूरत महसूस की जा रही है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह की अध्यक्षता में एक शीर्ष स्तरीय समिति, निजी क्षेत्र की अधिक भागीदारी पर ध्यान केंद्रित करते हुए, दक्षता में सुधार लाने और उत्पादन समय सीमा को कम करने के लिए काम कर रही है। इस समिति में भारतीय वायु सेना (आईएएफ), रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) और वैमानिकी विकास एजेंसी (एडीए) के अधिकारी शामिल हैं तथा उम्मीद है कि यह समिति शीघ्र ही अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी।

एम्का परियोजना की देखरेख करने वाली समिति में वायुसेना के उप-प्रमुख एयर मार्शल एसपी धारकर, रक्षा उत्पादन सचिव संजीव कुमार और रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) तथा एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी (एडीए) के वरिष्ठ अधिकारी जैसे प्रमुख व्यक्ति शामिल हैं। उनकी रिपोर्ट जल्द आने की उम्मीद है और इसमें बताया जाएगा कि एम्का को अवधारणा से लेकर उत्पादन तक कम से कम समय में कैसे बदला जाए।

विमान के इंजन के विकास पर खासतौर से ध्यान दिया जा रहा है। भारत 25 टन के एएमसीए के लिए स्वदेशी 110 किलोन्यूटन थ्रस्ट-क्लास इंजन बनाने की योजना बना रहा है, जिसमें संभवतः जनरल इलेक्ट्रिक (अमेरिका), सैफ्रान (फ्रांस) और रोल्स-रॉयस (यूके) जैसी वैश्विक एयरोस्पेस फर्मों के साथ तकनीकी सहयोग शामिल है। इस नई समिति का गठन रक्षा सचिव की अध्यक्षता में पहले की गई रक्षा समीक्षा के बाद किया गया था, जिसमें भारतीय वायुसेना (आईएएफ) की क्षमताओं को मजबूत करने के लिए एक रोडमैप प्रस्तुत किया गया था। 3 मार्च को रक्षामंत्री राजनाथ सिंह को सौंपी गई उस रिपोर्ट में समयबद्ध तरीके से परिचालन संबंधी कमियों को दूर करने की तत्काल आवश्यकता पर प्रकाश डाला गया था।

रक्षा सचिव ने इसकी अध्यक्षता की, जिसमें वायु सेना के उप प्रमुख, सचिव (रक्षा उत्पादन), रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव तथा डीआरडीओ के अध्यक्ष, महानिदेशक अधिग्रहण सदस्य व वायु सेना के सदस्य सचिव शामिल थे। समिति ने मुख्यतः उन क्षेत्रों की पहचान की है, जिन्हें महत्व देना चाहिए।

इस सिलसिले में अल्प, मध्यम और दीर्घ अवधि में कार्यान्वयन हेतु सिफारिशें की पेश की गई हैं, ताकि भारतीय वायु सेना के वांछित क्षमता संवर्धन लक्ष्यों को इष्टतम तरीके से प्राप्त किया जा सके। इस रिपोर्ट में एयरोस्पेस क्षेत्र में ‘आत्मनिर्भरता’ को बढ़ावा देने के लिए निजी क्षेत्र द्वारा डीपीएसयू और डीआरडीओ के प्रयासों को पूरक बनाने की आवश्यकता पर भी बल दिया गया है। रक्षामंत्री ने समिति के कार्य की सराहना की है और निर्देश दिया है कि सिफारिशों का समयबद्ध तरीके से पालन किया जाए।

कार्यक्रम की प्रगति

एम्का, स्विंग-रोल एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट है जिसे भारतीय वायुसेना को बहु-भूमिका क्षमताएँ प्रदान करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। चीन और पाकिस्तान जैसे विरोधियों के साथ बढ़ते स्टैल्थ और क्षमता अंतर का मुकाबला करने के लिए इसके विकास को गति दी जा रही है। एम्का के अलावा भारतीय नौसेना के लिए ट्विन-इंजन डेक-बेस्ड फाइटर (टैडबीएफ) भी विकसित किया जा रहा है। यह विमान प्रारंभिक डिजाइन समीक्षा चरण में है और इसके बहु-भूमिका डिजाइन के साथ समुद्री रक्षा क्षमताओं को बढ़ाने की उम्मीद है।

रूस ने भारत को अपना पाँचवीं पीढ़ी का एसयू-57ई लड़ाकू विमान बेचने की पेशकश को फिर से दोहराया है, जिसमें स्थानीय उत्पादन और भारत के एम्का  कार्यक्रम में सहायता का प्रस्ताव है। यह अमेरिका द्वारा पेश किए गए एफ-35 के विकल्प के रूप में आया है। हाल में प्रधानमंत्री की अमेरिका यात्रा के दौरान राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने कहा कि हम भारत को एफ-35 बेचेंगे। भारत को वस्तुतः पाँचवीं पीढ़ी के विमान की जरूरत है, क्योंकि चीन के पास तो ऐसे विमान हैं ही, अब पाकिस्तान भी चीन से जे-35 खरीदने जा रहा है। वैसे भी भारत को 4.5 पीढ़ी के तेजस जेट विमानों के उत्पादन में देरी तथा चीन और पाकिस्तान के साथ क्षमता अंतर को पाटने की आवश्यकता जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति द्वारा स्वीकृत एएमसीए परियोजना में 15,000 करोड़ रुपये से अधिक का प्रारंभिक निवेश किया जाएगा, जिसका उद्देश्य भारत को पाँचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों वाले चुनिंदा देशों के समूह में शामिल करना है। वर्तमान में, केवल अमेरिका, चीन और रूस के पास ही पाँचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान हैं।

एएमसीए में उन्नत स्टैल्थ क्षमताएं होंगी, जिनमें इंटरनल वैपन बे और कम रेडार क्रॉस-सेक्शन शामिल होगा, जिससे यह दुश्मन की पकड़ से बचने में अत्यधिक प्रभावी होगा। इसे हवाई वर्चस्व स्थापित करने, जमीनी हमले और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध मिशन जैसी कई भूमिकाएं निभाने के लिए डिज़ाइन किया गया है।

स्क्वॉड्रनों की कमी

एम्का पर जोर देने का एक कारण वायुसेना के घटते लड़ाकू स्क्वाड्रनों की समस्या का समाधान करना भी है। वायुसेना वर्तमान में अधिकृत स्क्वाड्रनों से कम स्क्वाड्रनों के साथ काम कर रही है, और आने वाले वर्षों में कई और स्क्वाड्रन सेवानिवृत्त होने वाले हैं। वायुसेना के पास अभी सिर्फ 30 फाइटर स्क्वॉड्रन हैं, जबकि 42 होने चाहिए। एक स्क्वॉड्रन में 18 लड़ाकू विमान होते हैं। अगले 10 साल में कम से कम आठ और स्क्वॉड्रन रिटायर हो जाएंगे। यह चिंता का विषय है। एम्का, तेजस एमके-1ए और एमके-2 जैसी अन्य स्वदेशी परियोजनाओं के साथ, भारतीय वायुसेना के बेड़े के आधुनिकीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

फ्लाइटग्लोबल की 2025 रिपोर्ट के अनुसार , भारतीय वायुसेना के पास 31 तेजस विमान सेवा में हैं और 83 अन्य विमानों का ऑर्डर दिया गया है (साथ ही प्रशिक्षण के लिए एक और सात अन्य प्रशिक्षण विमान ऑर्डर पर हैं)। 97 और जेट विमानों का ऑर्डर देने की भी योजना है। अंततः वायुसेना 18 स्क्वाड्रन (बाद में भारी मार्क 2 सहित) के लिए कम से कम 324 तेजस खरीदने की योजना बना रही है।

भारतीय वायुसेना लड़ाकू विमानों के एक दिलचस्प मिश्रण से बनी है। इनमें 130 ब्रिटिश जगुआर, 36 पुराने सोवियत मिग-21, 65 सोवियत मिग-29, 44 फ्रेंच मिराज 2000एच/आईएस, 36 फ्रेंच राफेल, 265 रूसी एसयू-30एमकेआई और 31 भारतीय तेजस शामिल हैं।

एम्का की समय-सीमा

एम्का की विकास समय-सीमा महत्वाकांक्षी है, पहला प्रोटोटाइप 2028 के अंत तक आने की उम्मीद है और इसका बड़े पैमाने पर उत्पादन 2033 या 2034 तक शुरू होने की योजना है। विमान में शुरू में जीई-एफ414 इंजन का प्रयोग किया जाएगा, तथा बाद के संस्करणों में इसे अधिक शक्तिशाली 110 किलोन्यूटन इंजन में अपग्रेड करने की योजना है। यह परियोजना क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों का मुकाबला करने के लिए स्वदेशी रक्षा क्षमताओं पर भारत के रणनीतिक फोकस को रेखांकित करती है।

भारत ने बीते कुछ वर्षों में फ्रांस से जो 36 राफेल फाइटर जेट खरीदे थे, उनसे  दो स्क्वॉड्रन बनाए गए। एक स्क्वॉड्रन की तैनाती पाकिस्तान की सीमा पर जबकि दूसरे की तैनाती चीन की सीमा पर की गई। वायुसेना में एम्का के 7 स्क्वॉड्रन शामिल करने की योजना है। पहले दो स्क्वॉड्रनों में 98 किलोन्यूटन थ्रस्ट श्रेणी के जीई-एफ414 इंजन लगे होंगे, वहीं अगले पाँच में 110 किलोन्यूटन इंजन होंगे। इसके अलावा 180 तेजस मार्क-1ए और 108 तेजस मार्क-2 लड़ाकू विमान शामिल करके धीरे-धीरे कमी को पूरा करने की योजना है।

भविष्य के युद्धों में वायुसेना की भूमिका बढ़ती जा रही। खासतौर से तकनीक जिस तेजी से विकास कर रही है, उसमें विमानों की नई पीढ़ियाँ तेजी से सामने आ रही हैं। खासतौर से चालक रहित ड्रोन विमानों का विकास ध्यान खींच रहा है। लड़ाकू विमानों की क्षमताओं को चौथी पीढ़ी से बढ़ाकर पांचवीं और छठी पीढ़ी तक अपग्रेड किया जा रहा है। इसके अलावा बियॉन्ड विज़ुअल रेंज मिसाइलों (बीवीआर) का विकास भी ध्यान खींच रहा है, जिसमें भारत की उपलब्धि अच्छी है। हाल में भारत ने अस्त्र-3 का परीक्षण किया है, जिसे गांडीव नाम दिया गया है।

भारत का ‘अस्त्र’

एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी (एडीए) ने गत 12 मार्च को एलसीए एएफ एमके1 प्रोटोटाइप लड़ाकू विमान से देश में ही विकसित बियॉन्ड विजुअल रेंज एयर-टू-एयर मिसाइल (बीवीआरएएएम) का सफल परीक्षण किया है। यह परीक्षण 12 मार्च, 2025 को ओडिशा के चांदीपुर तट से किया गया। इस परीक्षण के तहत, उड़ते हुए लक्ष्य पर मिसाइल के सीधे प्रहार को सफलतापूर्वक प्रदर्शित किया गया। सभी उप-प्रणालियों ने सभी मिशन मापदंडों और उद्देश्यों को पूरा करते हुए सटीक प्रदर्शन किया।

अस्त्र मिसाइल को डीआरडीओ ने डिजाइन और विकसित किया है जो 100 किमी से अधिक दूरी तक के लक्ष्यों को भेदने में सक्षम है और उन्नत निर्देश और नेविगेशन क्षमताओं से लैस है। मिसाइल को पहले ही भारतीय वायुसेना में शामिल किया जा चुका है। यह सफल परीक्षण एलसीए एएफ एमके1ए संस्करण को शामिल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

भारतीय वायुसेना के पास इसके पहले राफेल पर 150 किलोमीटर तक मार करने वाली मीटियर एयर-टू-एयर मिसाइलें हैं। मिराज-2000 लड़ाकू विमानों पर 80 किलोमीटर तक मार करने वाली माइका मिसाइलें भी तैनात हैं। रूस से आयातित आर-73 और आर-77 एयर-टू-एयर मिसाइलें भी भारतीय वायुसेना के बेड़े में शामिल हैं, लेकिन इनकी रेंज कम है। अब अस्त्र सीरीज की मिसाइलें 300 किलोमीटर से ज्यादा दूसरी तक मार करने में सफल हैं।

 

एएमसीए और जे-35ए की तुलना

भारत का एम्का और चीन का जे-35ए दोनों ही पाँचवीं पीढ़ी के स्टैल्थ फाइटर हैं, लेकिन वे क्षमताओं, डिजाइन दर्शन और ऑपरेशनल तत्परता में काफी भिन्न हैं। नीचे मुख्य विशेषताओं के आधार पर तुलना की गई है:

 

विशेषता एम्का (भारत) जे-35ए (चीन)
स्टैल्थ एस-आकार के वायु इनटेक और मिश्रित सामग्रियों के साथ कम रडार क्रॉस-सेक्शन के लिए तैयार। उन्नत स्टैल्थ, जैसे रेडार-अवशोषक सामग्री और आंतरिक हथियार कक्ष (इंटरनल वैपन बे)।

 

इंजन सुपर-क्रूज़ क्षमता वाले संशोधित जीई-एफ414 दो इंजन। गुइझोऊ डब्लूएस-21 इंजन में सुपर-क्रूज़ की क्षमता है, लेकिन यह पश्चिमी देशों की तुलना में कम उन्नत है।
अधिकतम गति मैक 2.15 (लगभग 2,600 किमी प्रति घंटा, 1,616 मील प्रति घंटा)। मैक 1.8 (2,222 किमी प्रति घंटा/1,381 मील प्रति घंटा)।
कॉम्बैट रेंज 1,620 किलोमीटर (1,010 मील)। 1200 किलोमीटर  (746 मील)।
एवियॉनिक्स और रेडार स्वदेशी उत्तम एसा रेडार; इसमें उन्नत सेंसर और प्रौद्योगिकियों का इस्तेमाल। संभवतः चीनी एसा रेडार और डिस्ट्रीब्यूटेड एपर्चर सिस्टम (डीएएस) से लैस होगा।
हथियार अस्त्र मार्क-2/3 मिसाइलें और भविष्य के हाइपरसोनिक हथियार; आंतरिक और वाह्य पेलोड। पीएल-15 मिसाइलें; स्टैल्थ मिशनों के लिए इंटरनल वैपन बे।
परिचालन तत्परता

 

2035 तक उत्पादन अपेक्षित; अभी प्रोटोटाइप चरण में। परिचालन परीक्षण जारी है; विमान वाहक-संस्करण उपलब्ध है।