ऐतिहासिक विकास
चीन ने 1980 के दशक में अपने ऐतिहासिक विकास में एक नया मोड़ लिया, जब एक समाजवादी कम्युनिस्ट देश ने पूंजीवाद को अपनाया। विकास और बढ़ती आकांक्षाएं एक-दूसरे को बढ़ावा दे रही थीं। 1990 के दशक में चीन की जी0डी0पी वृद्धि औसतन प्रति वर्ष लगभग 10% रही है। चीन का ये सौभाग्य रहा कि उसे बहुत सारी चुनौतियों से निपटना नहीं पड़ा, जब कुछ आए भी, तो उन्हें पूरी सख्ती से निपटाया गया। समस्याओं के प्रति चीनी प्रतिक्रिया चौंकाने वाली थी। बढ़ती आबादी का समाधान एक अमानवीय ‘सिंगल चाइल्ड’ की नीति थी जिसमें गैर-अनुपालन के लिए कठोर जुर्माना शामिल था; छात्र प्रदर्शनकारियों का विरोध करने के लिए, चीन ने मार्शल लॉ घोषित किया और 4 जून 1989 को सेना के टैंकों को तियानमेन स्क्वायर पर भेज दिया; बीजिंग की सड़कों पर भिखारियों के बारे में शर्मिंदा महसूस करते हुए, रातोंरात लोगों के इस पूरे वर्ग को शहर की सीमा से बाहर निकाल दिया गया; उइगर मुसलमानों के बीच कट्टरता के कथित खतरे को संबोधित करने के लिए लाखों लोगों को अवैध रूप से गिरफ्तार और प्रताड़ित किया गया। चीनी तरीकों में प्रत्येक पिछले की तुलना में अधिक भयानक था, जो मानव स्वतंत्रता के स्वीकार्य अंतरराष्ट्रीय कानूनों से काफी नीचे था।
निर्विवाद ताकत
चीन के विकास के दौरान मानवाधिकार एजेंसियों ने लगातार गंभीर दुर्व्यवहारों को चिह्नित किया। धीरे-धीरे 21 वीं सदी की शुरुआत तक जैसे-जैसे चीन ने अपनी प्रगति जारी रखी, चीन के विचलित करने वाले मानवाधिकार रिकॉर्ड के खिलाफ आवाज़ बहुत हद तक शांत हो गयी। मार्च 2013 में चीन के 7 वें राष्ट्रपति के रूप में शी जिनपिंग का अनावरण, चीन को टकराव के रास्ते पर मजबूती से आगे बढ़ाता गया। शी जिनपिंग ने माओ या शियाओपिंग की तर्ज पर इतिहास की किताबों में खुद को चिह्नित करने का अपना इरादा कभी नहीं छिपाया। नेशनल पीपुल्स कांग्रेस, जो कि चीन की सर्वोच्च निर्णय लेने वाली संस्था है या इसे भारतीय संसद का चीनी समकक्ष भी कहा जा सकता है, उसने कई बड़े फैसले लिए। शी तेजी से 2012 में चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव और केंद्रीय सैन्य आयोग के अध्यक्ष के रूप में स्थापित हुए; 2013 में इसके राष्ट्रपति बने; और फिर 2018 में संभावित आजीवन शासक का स्वरुप लिया। शी अब चीन में एक निर्विवाद नेता थे, जिनके पास अथाह अधिकार थे। शी ने प्रभावी रूप से सत्ता के स्थानों पर पसंद के लोगों को बिठाया। इससे पहले कि कोई इस हाई स्पीड घटनाक्रम को भांप पाता शी ने खुद को अत्यंत शक्तियों के साथ अधिकृत कर लिया, जो कई तानाशाहों को शर्मिंदा कर देगा। चीन के भीतर अपने अधिकार को मज़बूत करने के बाद, शी अब दुनिया के आधुनिक इतिहास में अपने लिए विशेष स्थान की परिकल्पना रखते है।
क्वाड का उद्भव
शी का उदय और चीन का व्यावहारिक पतन जटिल रूप से जुड़ा रहा है। नवंबर 2013 में शी के राष्ट्रपति पद पर आने के मुश्किल से आठ महीने बाद ही चीन ने पूर्वी चीन सागर के ऊपर एक विस्तृत वायु रक्षा पहचान क्षेत्र घोषित कर दिया था। इसके बाद चीनी गश्ती दलों और पि0एल0ए0ए0एफ द्वारा संप्रभु स्थान के दुस्साहसिक दावों की एक श्रृंखला शुरू हुई। ये कार्रवाइयां कोई भटकी हुई कार्रवाई नहीं थी, ये राष्ट्रपति शी की स्पष्ट अनुमति के तहत हो रही थीं । चीन द्वारा समुद्री उल्लंघन क्षेत्रीय जल में प्रवेश करने में बदल गए, गश्ती जहाजों की जगह नौसेना के जहाजों ने ले लिया, हवाई क्षेत्र की निगरानी के बाद पडोसी मुल्क के हवाई क्षेत्र का उल्लंघन किया। इसने जापान के सेनकाकू द्वीप पर बेतुके दावे किए और पारासेल द्वीप को चीनी क्षेत्र के हिस्से के रूप में एकीकृत करके ई0ई0जेड का विस्तार किया। ‘नाइन डैश’ लाइनों की व्याख्या के आधार पर चीन द्वारा विस्तारित ई0ई0जेड के दावों को 2016 के एक फैसले में अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय द्वारा खारिज कर दिया गया था। लेकिन चीन ने, इसका पालन करना तो दूर, उसने फैसले को स्वीकार करने से ही इनकार कर दिया। मानो ये सब पर्याप्त नहीं थें, चीन ने पश्चिम की ओर विस्तार करने का फैसला किया और गलवान घुसपैठ को अंजाम दिया गया। यह एक अप्रत्याशित क्षण था, इसके बाद जो हुआ वह चीन ने भी कभी नहीं सोचा था। चीन को भारतीय सैनिकों से एक कड़ी प्रतिक्रिया मिली। जिस बात ने दुनिया के होश को हिला दिया, वह था चीन का गैरजिम्मेदाराना आक्रामक व्यवहार और नियम आधारित व्यवस्था के प्रति उसकी उपेक्षा। इन घटनाक्रमों ने मार्च 2021 में भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के चतुष्कोणीय सुरक्षा संवाद (या क्वाड) को फिर से सक्रिय कर दिया। क्वाड ने “एक मुक्त और खुले इंडो – पैसिफ़िक के लिए एक साझा दृष्टिकोण” तथा “पूर्वी और दक्षिण चीन सागर में नियम-आधारित व्यवस्था” की परकल्पना रखी है। क्वाड के जनादेश को सीधे किसी एक देश के खिलाफ नहीं रखा गया। हालांकि, इसकी रूपरेखा ने चीन को बेहतर आचरण की ओर मजबूर करने के अपने स्पष्ट एजेंडे को जरूर उजागर कर दिया है।
भयानक परिदृश्य
यह माना जाता है की क्वाड और उसके इरादों को निशाना बनाने वाले चीन के भड़काऊ बयानों के बावजूद, क्वाड अपने स्पष्ट उद्देश्यों को परिभाषित नहीं करेगा। यह सब विरोधी को धोखा देने के लिए रणनीतिक मायाजाल है, लेकिन फिर भी क्वाड यह नहीं कहेगा कि चीन विरोधी है भी या नहीं। क्वाड के प्रत्येक सदस्यों का चीन के साथ आधिपत्य से लेकर अस्तित्व के खतरे तक बहुत गंभीर मतभेद हैं। चूंकि चीन अंतरराष्ट्रीय संबंधों ऐवम नियमों में आक्रामकता जारी रखे हुए है, इसलिए क्वाड का प्रभाव सबसे पहले हिंद-प्रशांत क्षेत्र में महसूस किया जाएगा। चीन जो कुछ भी करेगा, क्वाड उसके सामने चुनौती के रूप में खुद को स्थापित करता प्रतीत होगा, और यह चीन के लिए एक चिंतामय परिदृश्य है। चीन क्वाड की संयुक्त क्षमताओं को पूरी तरह से जानता है। नेट वर्थ या जी0डी0पी के मामले में क्वाड चीन से 43% अधिक बड़ा है; इसमें 70% बड़ा वार्षिक सैन्य खर्च है; इसका संचयी वार्षिक व्यापार 30% अधिक है; और जनसंख्या 23% बड़ी है। लेकिन चीन के लिए क्वाड का असली जवाब प्रतिरोध के एक विस्तृत जाल का निष्पादन है। क्वाड ने सैन्य हस्तक्षेप से लेकर विकास परियोजनाओं, हिंद-प्रशांत क्षेत्र के देशों को सहायता और विस्तारित सॉफ्ट पावर के माध्यम से अपने प्रभाव को और बढ़ाने के लिए विभिन्न उपायों तक कार्य योजनाएं तैयार की हैं। इसका उद्देश्य चीन के मुकाबले एक आकर्षक विकल्प प्रदान करना है जो अधिक पारदर्शी, अधिक आकर्षक और अधिक आश्वस्त हो। एक महत्वपूर्ण पहलू जहां चीन गंभीर रूप से कमज़ोर दिखता है।
दीर्घकालिक खतरा
क्वाड के अचानक फिर से उभरने से चीन में खलबली मची हुई है. सितंबर 2021 के एक लेख में ग्लोबल टाइम्स ने क्वाड की ‘भयावह गिरोह’ के रूप में तुलना की, जिसका उद्देश्य ‘चीन को घेरना’ है । जबकि चीनी नीति निर्माताओं ने क्वाड को दीर्घकालिक खतरा बताया है। ऐसा लगता है मानो एक स्कूली बच्चे की तरह क्वाड को लेकर शिकायत कर रहा है। चीन को पता होना चाहिए था, भू-राजनीति इस तरह से काम नहीं करती। क्वाड द्वारा उठाए गए कदम केवल उनके डर को और बढ़ा रहे हैं। यह सिर्फ शुरुआत है, बहु-स्तरीय आयामों के बीच; सैन्य हिस्से का नेतृत्व अमेरिका कर रहा है। यह दक्षिण चीन सागर की आक्रामक गश्त, ताइवान को आश्वासन भेज रहा है, चीनी वायु और नौसैनिक युद्धाभ्यास पर अग्रिम खुफिया जानकारी के साथ सहायता कर रहा है, इस क्षेत्र में सैन्य रूप से पुनर्निवेश कर रहा है। सामाजिक-अर्थशास्त्र पर, क्वाड ने सुरक्षित वैक्सीन एवं मेडिकल साज़ो सामान को बढ़ने का वचन दिया है; उच्च मानकों वाला बुनियादी ढांचा; जलवायु संकट का मुकाबला करना; और उभरती प्रौद्योगिकियों पर सहयोग करना। जबकि निवेश का नेतृत्व जापान और ऑस्ट्रेलिया द्वारा किया जा रहा है, भारत ने क्वाड के बुनियादी ढांचे के विकास मॉडल का केंद्र बिंदु बनकर अपनी विशाल क्षमताओं के साथ एक महत्वपूर्ण हिस्सेदारी की जिम्मेदारी ली है। भारत एकमात्र क्वाड राष्ट्र है जो चीन के साथ भूमि सीमा साझा करता है। ये चीन के लिए क्वाड की वर्तमान प्रतिक्रियाएं हैं, जो एक-मुश्त सीमा निर्धारित करने और बाद में आक्रामक हस्तक्षेप करने के लिए सार्थक होंगी। चीन के नीति निर्माता हिंद-प्रशांत क्षेत्र में क्वाड के अनुमानित प्रभाव को मापने के लिए प्रयास कर रहे हैं और उन्हें ऐसा करना भी चाहिए., क्योंकि दांव पर बहुत कुछ लगा है। इतनी बड़ी गिरावट से व्यवस्था में बदलाव शुरू हो सकता है और बदलाव ही चीन को सबसे ज्यादा डराता है। अगर चीन निकट भविष्य में अपने तरीके नहीं सुधारता है, तो इसका प्रभाव अत्यंत विनाशकारी होगा!
Ravi Srivastava
(The writer has varied experience in security paradigm and is a keen follower of international geopolitics. He is also the author of popular blog site geostrat.in on geo-strategic affairs.)



