ज़ुहाई एयरशो-2022: गत 8-13 नवंबर को चीन के ज़ुहाई एयरशो-2022 में चीनी सैन्य-प्रतिष्ठान ने चालक रहित हवाई प्रणालियों (यूएएस) की व्यापक रेंज का प्रदर्शन किया। इनमें एफएच-97ए लॉयल विंगमैन और आईईडी ले जाने वाले हैक्साकॉप्टर लूंग-4 शामिल थे। इस डिस्प्ले में इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर ‘स्पेशलिस्ट’ डब्लूज़ी-10 और ‘सीएच’ सीरीज़ ड्रोन के 15 से ज्यादा वेरिएंट भी शामिल थे। इनके अलावा चीनी मीडिया चैनलों में कुछ ऐसे वीडियो भी दिखाए गए, जिनमें किसी खास काम को करने के लिए सैकड़ों ड्रोन के ड्रोन स्वार्म नजर आते थे।
इन बड़े और छोटे सिस्टम्स के अलावा यूएवी हमलों का सामना करने के लिए दो काउंटर ड्रोन सिस्टम भी प्रदर्शित किए गए। ये थे एचक्यू-17एई, जो 5 किलोमीटर की छोटी रेंज का सिस्टम है और दूसरा एफके3000, जिसकी रेंज 12 किलोमीटर बताई जाती है।
चीनी कार्यक्रमों पर नजर रखने वालों में सबसे ज्यादा शंकालु पर्यवेक्षक भी सैनिक और असैनिक दोनों क्षेत्रों में ड्रोन निर्माण और विकास से जुड़ी प्रगति को स्वीकार करते हैं।
सैटेलाइट आधारित कमांड और कंट्रोल सिस्टम्स से जुड़े ड्रोनों का विकास खासतौर से फोकस का विषय रहा है। इस प्रदर्शनी में पेश की गई पूरी रेंज से अंदाज लगाया जा सकता है कि पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) अपने ऑपरेशनल कॉम्बैट प्लान में ड्रोनों के इस्तेमाल पर कितना जोर दे रही है। इसलिए हमें जिस सवाल का जवाब देना चाहिए, वह यह है कि हम इस विकास को किस नजरिए से देखते हैं।
| नाम | टिप्पणी |
| एफएच97ए |
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| सीएच-5 |
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| सीएच-7 |
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| सीएच-4 |
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| डब्लूज़ी-10
(विंग लूंग-10) |
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| विंग लूंग-3 |
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| डब्लूज़ी-7 |
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| वीटॉल लूंग-5 | वर्टिकल टेक ऑफ और लैंडिंग बमबारी संस्करण (दो अन्य संस्करण हैं लूंग-1 टार्गेटिंग और लूंग-2 रेकी। |
| हैक्साकॉप्टर लूंग-4 | आईईडी वाहक। |
| एमडी-22 | सीएएस इंस्टीट्यूट ऑफ मिकेनिक्स एंड द गुआंगडॉन्ग एयरोडायनैमिक रिसर्च एकेडमी (जीएआरए) द्वारा निर्मित यह ड्रोन अंतरिक्ष का निकटवर्ती हाइपरसोनिक टेक्नोलॉजी टेस्ट प्लेटफॉर्म हो सकता है। हाइपरसोनिक ड्रोन (माक-7) लंबाई 10.8 मीटर, चौड़ाई (स्पैन) 4.5 मीटर। |
| काउंटर यूएएस सिस्टम्स | |
| एचक्यू-17एई |
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| एफके 3000 | एक मास्टर कमांड वेहिकल और दो चालक रहित वाहनों के साथ ड्रोन हमले के विरुद्ध इस सिस्टम की रेंज 300 मीटर से 12 किलोमीटर के बीच बताई गई है। |
हथियार के रूप में ड्रोन
इन सैनिक-ग्रेड के ड्रोनों को चीन अनेक देशों को बड़े आकर्षक मूल्य पर खुलेआम दे रहा है। सैनिक-ग्रेड के ड्रोनों के अलावा डीजेआई जैसी चीनी कंपनियों का इनके व्यावसायिक बाजार पर प्रभुत्व है। विश्व का ज्यादातर ड्रोन-उद्योग, जिसमें भारत भी शामिल है, इसके महत्वपूर्ण उपकरणों के लिए चीनी उत्पादकों पर आश्रित है, जो वस्तुतः ऐसी कीमतों पर इन्हें उपलब्ध कराते हैं, जिनका मुकाबला नहीं किया जा सकता।
व्यावसायिक-ग्रेड के ड्रोनों का व्यापक इस्तेमाल इन दिनों चल रहे रूस-यूक्रेन युद्ध में सैनिक-ऑपरेशंस की सहायता के लिए वस्तुतः हथियार की तरह किया जा रहा है। इस सिलसिले में ध्यान देने वाला एक महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि इन ड्रोनों में दोनों पक्ष अपने-अपने तरीके से बदलाव करके उनका फौजी ऑपरेशंस में इस्तेमाल कर रहे हैं। केवल कम्युनिकेशन सिस्टम और उनके मार्फत इस्तेमाल हो रहे गोला-बारूद से ही इन दोनों पक्षों का अंतर समझा जा सकता है।
कॉमर्शियल ड्रोन्स के कारण युद्ध में ऐसे लोग भी शामिल हो रहे हैं, जिनसे फौजी-कार्रवाइयों की उम्मीद नहीं की जाती है। मसलन एक युवक को इस बात की खोज का श्रेय दिया जाता है, जिसने शत्रु के टैंकों के एक कॉलम को तबाह कर दिया। उसने कॉमर्शियल-ग्रेड के एक ड्रोन की मदद से टार्गेट को ट्रेस, लोकेट और रिपोर्ट करने के लिए उनके कोऑर्डिनेट्स (उनकी भौगोलिक स्थिति) का एकदम सही पता लगाकर दिखाया। ऐसी परिघटनाएं सुरक्षा की दृष्टि से चिंताजनक हैं और इनके गंभीर निहितार्थ हैं।
इन वजहों से दुनियाभर की सुरक्षा एजेंसियाँ और काउंटर-ड्रोन सिस्टम्स का उत्पादन करने वाली कंपनियाँ यूक्रेन-युद्ध का गहराई से अध्ययन कर रही हैं। वे इस युद्ध को केस स्टडी के रूप में देख रही हैं और इसमें अपने उपकरणों के युद्ध-परीक्षण की संभावनाएं देख रही हैं। कुछ साल पहले हुए आर्मेनिया-अजरबैजान युद्ध में ड्रोनों के इस्तेमाल के कारण अजरबैजान का पलड़ा भारी रहा।
हाल के वर्षों में आतंकवादियों और अपराधियों ने भी ड्रोनों का इस्तेमाल करना शुरू किया है। इसकी सबसे बड़ी वजह है इनके उपकरणों और ड्रोन बनाने के लिए जरूरी तकनीकी जानकारी की आसान उपलब्धता और इन्हें संचालित करने वालों कीको प्राप्त गोपनीयता का लाभ।
मौकापरस्त चीनी इन सब बातों को बड़ी बारीकी से देख-समझ रहे हैं और उन्होंने इसका व्यावसायिक लाभ उठाने के लिए आईईडी से लैस हैक्साकॉप्टर लूंग-5 बाजार में उतार दिया है।
खतरा
हाल के वर्षों में चीनियों ने मानव रहित सिस्टम्स और स्वार्म ड्रोन की अवधारणा में जबर्दस्त महारत हासिल कर ली है। ‘गुणवत्ता और विश्वसनीयता’ के मामले में बदनामी के बावजूद चीनी ड्रोन को विदेशी ग्राहकों के बीच अच्छी स्वीकृति मिल रही है। हाल के युद्धों और टकरावों में चीनियों ने ‘लो-टेक’ सिस्टम्स में जबर्दस्त वृद्धि करके तकनीकी पिछड़ेपन की कमी को पूरा कर लिया है।
रिकोनेसां, सर्विलांस और महत्वपूर्ण शस्त्रास्त्र को नष्ट करने के परंपरागत उपकरणों के लिए इन सिस्टम्स ने चुनौती पेश की है। शत्रु पर बहुमुखी आक्रमण (सैच्युरेशन स्ट्राइक) के लिए कई प्रकार के सिस्टम्स (मल्टीपल सिस्टम्स) को एकसाथ इस्तेमाल करना एक जानी-पहचानी रणनीति है। अब ड्रोन स्वार्म और लॉयल विंगमैन की विकसित होती अवधारणाएं शत्रु को पूरी तरह पस्त करने के लिए भविष्य के विकल्प के रूप में उभर कर सामने आ रही हैं।
चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने सत्ता पर अपनी पकड़ मजबूत कर ली है और वे खुद फौजी पोशाक पहन कर तस्वीरें खिंचवा रहे हैं। उन्होंने पीपुल्स लिबरेशन आर्मी से कहा है कि अपनी पूरी ऊर्जा युद्ध लड़ने और युद्ध की तैयारी करने में लगाएं।
हम जानते हैं कि चीनी अपने इरादे छिपाकर रखते हैं और मौका देख कर वार करते हैं। फौजी दबाव डालने के साथ-साथ आर्थिक दबाव डालने की भी उनकी सोची-समझी रणनीति है। दुनिया की और खासतौर से भारत की ड्रोन निर्माण व्यवस्था का चीनी निर्माताओं पर अवलंबन भी सब जानते हैं। चीनी व्यवस्था आर्थिक, सैनिक और राजनीतिक दबाव डालने की ऐसी रणनीति की अभ्यस्त है। वे इस नई तकनीक का इस्तेमाल भी इस रणनीति के लिए करना चाहते हैं।
हमें इस बात से खबरदार रहना चाहिए और अपने व्यापार असंतुलन को काबू में रखना चाहिए और स्वदेशी प्रयासों को बढ़ावा देना चाहिए। हमें इस बात पर भी निगाहें रखनी चाहिए कि अपनी सेनाओं के लिए हम जिन सॉफ्टवेयर और हार्डवेयरों का आयात कर रहे हैं, उनमें पीछे के रास्ते (बैकडोर) भी बन सकते हैं।
सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है निरंतर स्वदेशीकरण के प्रयासों का जारी रहना। हमें दबाव डालने वाली कोशिशों के जवाब में रणनीति बनानी चाहिए। दुश्मन की कोशिश है हमारे आंतरिक अंतर्विरोधों को उभारना और उनका फायदा उठाना। राष्ट्रीय सुरक्षा पर असर डालने वाली इन कोशिशों को विफल करना चाहिए। इनके साथ हमारा फोकस चीनी ड्रोनों के खतरे को दूर करने के लिए किफायती तरीके से स्वदेशी विकल्प तैयार करने पर होना चाहिए।
– विंग कमांडर भूपिंदर सिंह निज्जर (सेनि)