भारतीय नौसेना ने विशाखापत्तनम में गत 11 जुलाई को रक्षामंत्री की उपस्थिति में भारत में निर्मित उन्नत स्टैल्थ फ्रिगेट ‘आईएनएस महेंद्रगिरि’ को शामिल किया, जो नौसेना के पूर्वी बेड़े में शामिल हुआ है। 75% स्वदेशी सामग्री, उन्नत हथियार प्रणालियों और स्टैल्थ विशेषताओं से सुसज्जित, प्रोजेक्ट 17ए फ्रिगेट महेंद्रगिरि देश की हवाई, सतह और जलीय-आक्रमणों से रक्षा करेगा।
इससे पहले गत 21 जून को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत की समुद्री तैयारी और स्वदेशी रक्षा क्षमता को नई मजबूती प्रदान करते हुए कोलकाता में भारतीय नौसेना के प्रथम पंक्ति के तीन अत्याधुनिक पोतों को कमीशन किया। इनमें बहु-उद्देश्यीय क्षमताओं से लैस आईएनएस दूनागिरी, एक विशाल सर्वेक्षण पोत आईएनएस संशोधक और उथले पानी के पनडुब्बी-रोधी युद्धपोत आईएनएस अग्रय शामिल हैं। ये अत्याधुनिक जहाज देश की परिचालन क्षमताओं, भू-राजनीतिक खतरों के खिलाफ समुद्री सुरक्षा और समुद्री क्षेत्र में स्थितिजन्य जागरूकता को काफी बढ़ाएंगे।
भारतीय नौसेना ने 11 जुलाई, 2026 को आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में आयोजित एक समारोह में स्वदेशी रूप से निर्मित उन्नत स्टैल्थ फ्रिगेट ‘आईएनएस महेंद्रगिरि’ को अपने पूर्वी बेड़े में शामिल किया। रक्षामंत्री ने अपने संबोधन में इस अग्रिम पंक्ति के युद्धपोत को असाधारण डिजाइन क्षमताओं, विनिर्माण उत्कृष्टता, नौसेना-औद्योगिक तंत्र के तीव्र विकास और समय पर अत्याधुनिक प्लेटफॉर्म प्रदान करने की क्षमता के आधार पर जहाज निर्माण में भारत की बढ़ती आत्मनिर्भरता का प्रतीक बताया।
‘आईएनएस महेंद्रगिरि’ प्रोजेक्ट 17ए के अंतर्गत आने वाला छठा स्वदेशी स्टैल्थ फ्रिगेट है जिसे मात्र डेढ़ वर्ष के अंतराल में भारतीय नौसेना में शामिल किया गया है। इस शृंखला का पहला पोत ‘आईएनएस नीलगिरि’ जनवरी 2025 में शामिल किया गया। उसके बाद अगस्त में ‘आईएनएस उदयगिरि’ और ‘आईएनएस हिमगिरि’, इस वर्ष अप्रैल में ‘आईएनएस तारागिरि’ और पिछले महीने ‘आईएनएस दूनागिरि’ को शामिल किया गया। अब इस शृंखला के अंतिम पोत, विंध्यगिरि, के साथ 45,000 करोड़ रुपये की परियोजना 17ए जल्द पूरी हो जाएगी।
भारतीय नौसेना के वॉरशिप डिजाइन ब्यूरो द्वारा डिजाइन किया गया और मुंबई स्थित मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (एमडीएल) द्वारा निर्मित यह पोत वायु रक्षा, सतह-विरोधी युद्ध, पनडुब्बी-रोधी युद्ध, समुद्री अवरोधन, निगरानी और मानवीय सहायता एवं आपदा राहत (एचएडीआर) सहित समुद्री अभियानों को पूरा करने में सक्षम है। 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री से निर्मित इस युद्धपोत का विस्थापन लगभग 6,670 टन है और यह 28 समुद्री मील प्रति घंटे तक की गति प्राप्त करने में सक्षम है। यह सतह से सतह पर मार करने वाली सुपरसोनिक मिसाइलों, सतह से हवा में मार करने वाली मध्यम दूरी की मिसाइलों, पनडुब्बी रोधी युद्ध क्षमताओं और बहु-भूमिका वाले एक हेलीकॉप्टर से सुसज्जित है, साथ ही इसमें उन्नत स्टैल्थ विशेषताएं, आधुनिक सेंसर, नेटवर्क-केंद्रित युद्ध प्रणाली और अत्याधुनिक हथियार भी मौजूद हैं।
राजनाथ सिंह ने विश्वास व्यक्त किया, ‘आईएनएस महेंद्रगिरि को दुनिया की सबसे तेज और सबसे घातक क्रूज मिसाइलों में से एक ब्रह्मोस सतह से सतह पर मार करने वाली मिसाइल से सुसज्जित किया जा सकता है। इसमें बहु-क्रियाशील रेडार और सतह से वायु में मार करने वाली मिसाइलें लगी है जो लंबी दूरी पर हवाई खतरों का पता लगाने और उन्हें निष्क्रिय करने में सक्षम है। इसके शस्त्रागार में स्वदेशी रॉकेट लॉन्चर, टॉरपीडो लॉन्चर, एकीकृत पनडुब्बी रोधी रक्षा प्रणाली, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली और क्लोज-इन वेपन सिस्टम भी शामिल हैं। ये सभी क्षमताएं युद्धपोत को दुर्जेय और अभेद्य बनाती हैं।’ उन्होंने यह भी कहा कि यह ‘समुद्री पोत’ न केवल तट के पास बल्कि गहरे महासागरों में भी भारत के समुद्री हितों की रक्षा करेगा।
राजनाथ सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार की ओर से अगली पीढ़ी की प्रौद्योगिकियों में निवेश करते हुए अपनी पारंपरिक क्षमताओं को मजबूत करने के प्रति संतुलित दृष्टिकोण बनाए रखने की प्रतिबद्धता व्यक्त की। उन्होंने कहा, ‘ऑपरेशन सिंदूर राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा के लिए पारंपरिक और आधुनिक क्षमताओं के प्रभावी एकीकरण का एक उत्कृष्ट उदाहरण था।’ उन्होंने आगे कहा कि आईएनएस महेंद्रगिरि तकनीकी रूप से उन्नत और युद्ध के लिए तैयार नौसेना के निर्माण के प्रति राष्ट्र की प्रतिबद्धता का प्रतीक है।
पश्चिम एशिया संघर्ष के दौरान भारतीय नौसेना की भूमिका का उल्लेख करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि ऊर्जा सुरक्षा अभियान के तहत नौसेना ने 9,000 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के आवश्यक माल से लदे 18 व्यापारिक जहाजों की रक्षा की। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि ये प्रयास न केवल एक लड़ाकू बल के रूप में बल्कि भारत के आर्थिक हितों के प्रमुख रक्षक के रूप में भी नौसेना की भूमिका को दर्शाते हैं।
रक्षामंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि स्वदेशी युद्धपोत निर्माण केवल युद्धक मंचों के निर्माण तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह डिजाइन क्षमताओं, तकनीकी विशेषज्ञता, कुशल मानव संसाधन और समग्र समुद्री औद्योगिक तंत्र को भी मजबूत करता है। उन्होंने आगे कहा कि जहाज निर्माण इस्पात, इलेक्ट्रॉनिक्स, सेंसर, प्रणोदन प्रणाली, सॉफ्टवेयर, सटीक इंजीनियरिंग और रसद सहित कई क्षेत्रों में विकास को गति देता है, रोजगार सृजित करता है, नवाचार को बढ़ावा देता है और आर्थिक विकास में योगदान देता है।
रक्षामंत्री ने भारत को जहाज निर्माण और समुद्री रक्षा नवाचार के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करने के सरकार के दृष्टिकोण पर जोर देते हुए कहा कि देश मैरीटाइम इंडिया विजन 2030 जैसी पहलों के माध्यम से प्रगति कर रहा है। इसका उद्देश्य बंदरगाहों का आधुनिकीकरण करना, अंतर्देशीय जलमार्गों का विस्तार करना, रसद नेटवर्क को मजबूत करना और विश्व स्तरीय समुद्री तंत्र विकसित करना है। उन्होंने समुद्री विकास कोष, जहाज निर्माण वित्तीय सहायता योजना और जहाज निर्माण विकास योजना सहित प्रमुख उपायों का भी उल्लेख किया, जिनका उद्देश्य औद्योगिक क्षमता को बढ़ाना, आत्मनिर्भरता को मजबूत करना और आर्थिक हितों की रक्षा करना है।
नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्ण स्वामीनाथन ने आईएनएस महेंद्रगिरि को भारत की बढ़ती समुद्री क्षमता और तकनीकी आत्मनिर्भरता का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि प्रोजेक्ट 17ए के छठे फ्रिगेट का शामिल होना स्वदेशी युद्धपोत निर्माण में एक और उपलब्धि है, जिससे भारतीय नौसेना की परिचालन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारतीय नौसेना युद्ध के लिए तैयार, विश्वसनीय, एकजुट और भविष्य के लिए तैयार बल है।
नौसेना प्रमुख ने कहा कि एमडीएल और नौसेना ने इस परियोजना में कई नए मानदंड स्थापित किए हैं, जिनमें शुरू करने से लेकर सुपुर्दगी तक की समयावधि में लगभग 50 प्रतिशत की कमी शामिल है। यह अवधि 63 महीने से घटकर 31 महीने हो गई है। उन्होंने यह भी बताया कि कुल निर्माण समय में लगभग 20 प्रतिशत की कमी आई है। यह 95 महीने से घटकर 75 महीने हो गया है और सभी तकनीकी विश्लेषण सामान्यतः लगने वाले पाँच से सात समुद्री परीक्षणों के बजाय केवल एक ही समुद्री परीक्षण में पूरे कर लिए गए हैं। उन्होंने कहा कि ये उपलब्धियां एमडीएल, भारतीय निर्माताओं, एमएसएमई, युद्धपोत निरीक्षण दल, परीक्षण एजेंसियों और चालक दल के संयुक्त प्रयासों को दर्शाती हैं।
समारोह में कमीशनिंग पताका की परंपरा को छोड़कर जहाज पर राष्ट्रीय ध्वज को पहली बार फहराया गया। इस अवसर पर पूर्वी नौसेना कमान के फ्लैग ऑफिसर कमान-इन-चीफ वाइस एडमिरल संजय भल्ला, सीएमडी, एमडीएल कैप्टन जगमोहन (सेवानिवृत्त), वरिष्ठ नौसेना अधिकारी, पूर्व सैनिक, जहाज निर्माण उद्योग के प्रतिनिधि और अन्य आमंत्रित अतिथि उपस्थित थे।
आईएनएस महेंद्रगिरि
पूर्वी घाट की महेंद्रगिरि पर्वत श्रृंखला के नाम पर नामित, आईएनएस महेंद्रगिरि शक्ति, दृढ़ता और अदम्य संकल्प का प्रतीक है और इसका आदर्श वाक्य है ‘शक्तिशाली, विशाल, अद्वितीय’। कई एमएसएमई सहित 200 से अधिक भारतीय उद्योगों के योगदान से निर्मित यह जहाज भारत की बढ़ती रक्षा विनिर्माण क्षमता को दर्शाता है। इस फ्रिगेट में उन्नत स्टैल्थ विशेषताएं, संयुक्त डीजल या गैस प्रणोदन प्रणाली, एकीकृत प्लेटफॉर्म प्रबंधन प्रणाली और उन्नत स्वदेशी युद्ध प्रणालियां मौजूद हैं।
भारतीय नौसेना के सनराइज पूर्वी बेड़े में शामिल होने पर, आईएनएस महेंद्रगिरि हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की समुद्री युद्ध क्षमता और परिचालन पहुँच को बहुत ज्यादा बढ़ाएगा जिससे महासागर की परिकल्पना के तहत भविष्य के लिए तैयार नौसेना के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को बल मिलेगा।
इस युद्धपोत को ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों से लैस किया जा सकता है, जिन्हें दुनिया की सबसे तेज और सबसे घातक मिसाइलों में गिना जाता है। इसमें बराक-8 मध्यम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलों के लिए 32-सेल वाला ऊर्ध्वाधर प्रक्षेपण तंत्र भी है, जो हवाई खतरों के खिलाफ बेड़े की हवाई रक्षा प्रदान करता है। इसके अस्त्र-पैकेज में स्वदेशी रॉकेट लॉन्चर, टॉरपीडो ट्यूब, एक एकीकृत पनडुब्बी रोधी रक्षा प्रणाली, एक इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली और एक निकटवर्ती हथियार प्रणाली शामिल हैं। यह पोत संयुक्त डीजल या गैस प्रणोदन प्रणाली से संचालित है, जो इसे 28 समुद्री मील तक की गति और निरंतर तैनाती के लिए लंबी क्षमता प्रदान करता है।

